फर्रुखाबाद। राजेपुर ब्लॉक क्षेत्र में गंगा का जलस्तर लगातार तीसरे दिन बढ़ने से अमृतपुर तहसील के गंगा पार स्थित करीब 30 गांव बाढ़ से प्रभावित हो गए हैं। गांवों में पानी घुसने से ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। वहीं सैकड़ों बीघा खेत जलमग्न होने से किसानों की फसलें भी बर्बाद होने की कगार पर पहुंच गई हैं।
बाढ़ के पानी से मक्का, बाजरा और तिल की खड़ी फसलें डूब गई हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो खेतों में खड़ी पूरी फसल बर्बाद हो सकती है। इससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
बाढ़ का पानी तीस राम की मड़ैया, ईमानपुर, सोमवंशी, गोटिया पश्चिमी, गोटिया पूर्वी, सबलपुर, आशा की मड़ैया, बली पट्टी, सवलपुर, कंचनपुर, भूढ़िया, भेड़ा, इमादपुर, बमियारी, हरसिंहपुर, भावपुर और चौरासी सहित कई गांवों तक पहुंच गया है। तटवर्ती इलाकों में पानी अब ग्रामीणों के घरों के आसपास पहुंचने लगा है।
करीब आधा दर्जन गांवों के संपर्क मार्ग भी पानी के तेज बहाव की चपेट में आकर बाधित हो गए हैं। रास्तों पर पानी भरने से ग्रामीणों को रोजमर्रा के काम के लिए आने-जाने में परेशानी हो रही है। आवश्यक सामान लाने और बच्चों व बुजुर्गों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने में भी दिक्कतें बढ़ गई हैं।
ग्रामीण सर्वेश, हरिराम, सुमित और रामलाल का आरोप है कि गांवों में बाढ़ का पानी पहुंचने के बावजूद अभी तक नाव की व्यवस्था नहीं की गई है। उनका कहना है कि राजस्व टीम ने भी प्रभावित गांवों का दौरा नहीं किया है। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल नाव उपलब्ध कराने की मांग की है।
बाढ़ के कारण पशुओं के लिए हरे चारे का संकट भी गहरा गया है। ग्रामीण अवधेश सिंह, शिवराज, जगतपाल और मुन्नालाल ने बताया कि लगातार जलस्तर बढ़ने से खेतों के साथ गांवों में भी पानी भर रहा है। पशुओं के चारे की व्यवस्था करना मुश्किल हो रहा है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से बाढ़ प्रभावित गांवों में नावों की पर्याप्त व्यवस्था कराने के साथ स्वास्थ्य विभाग की टीम भेजने की मांग की है, ताकि प्रभावित लोगों को दवाएं उपलब्ध हो सकें और बीमारियों की रोकथाम की जा सके। ग्रामीणों का कहना है कि जलस्तर बढ़ने की स्थिति में समय रहते राहत और बचाव की व्यवस्था नहीं की गई तो हालात और गंभीर हो सकते हैं।


