नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट की नौ सदस्यीय संविधान पीठ ने ‘इंडस्ट्री’ की कानूनी परिभाषा को लेकर अहम फैसला सुनाते हुए सरकारी विभागों, स्कूलों और अस्पतालों में काम करने वाले कर्मचारियों से जुड़े पुराने श्रम विवादों को बड़ी राहत दी है। नौ जजों की पीठ ने 6:3 के बहुमत से फैसला दिया है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का संबंध 1978 के ऐतिहासिक बंगलूरू जल आपूर्ति एवं सीवरेज बोर्ड बनाम राजप्पा मामले से है। उस फैसले में ‘इंडस्ट्री’ की व्यापक परिभाषा तय की गई थी, जिसके कारण सरकारी कल्याणकारी विभागों, स्कूलों और अस्पतालों सहित कई संस्थानों के कर्मचारियों को औद्योगिक विवाद कानून के तहत संरक्षण मिला था।
ताजा फैसले के मुताबिक, औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 के तहत अदालत, ट्रिब्यूनल या श्रम प्राधिकरण के समक्ष लंबित मामलों को 1978 के फैसले के आधार पर तय किया जा सकता है। हालांकि, जिन मामलों में अंतिम फैसला हो चुका है, उन्हें इस फैसले के आधार पर दोबारा नहीं खोला जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि 1978 में तय की गई ‘इंडस्ट्री’ की व्यापक परिभाषा को औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 की व्याख्या के लिए सीधे लागू नहीं किया जा सकता। यानी पुराने औद्योगिक विवाद अधिनियम के लंबित मामलों और नए श्रम कानून के तहत बनने वाली स्थिति को अलग-अलग देखा जाएगा।


