लखनऊ। उत्तर प्रदेश के कई जिलों में शिक्षण संस्थानों की अव्यवस्थाओं और शिक्षकों की कमी को लेकर छात्रों के लगातार प्रदर्शन के बाद योगी सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। लखनऊ, आजमगढ़, महोबा, हमीरपुर और उन्नाव समेत कई जिलों में सामने आई शिकायतों को सरकार ने गंभीरता से लिया है। शासन ने अधिकारियों को शिक्षण संस्थानों की समस्याओं का तत्काल समाधान कराने और लापरवाही मिलने पर जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए हैं।
लखनऊ में जयप्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालय के छात्रों ने शिक्षकों की कमी को लेकर सड़क पर उतरकर प्रदर्शन किया था। छात्रों का कहना था कि कई महत्वपूर्ण विषयों के शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं, जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है। विद्यालय प्रबंधन के मुताबिक छह शिक्षकों की आवश्यकता के मुकाबले चार शिक्षक उपलब्ध थे और रसायन विज्ञान, खेल तथा इतिहास के शिक्षक नहीं थे। प्रदर्शन के दौरान राज्यमंत्री असीम अरुण ने छात्रों से बातचीत कर समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया।
हमीरपुर में भी नई पीढ़ी के छात्रों का प्रदर्शन प्रशासन के लिए चर्चा का विषय बना। यहां स्कूली बच्चों ने खराब और कीचड़ भरे रास्ते की समस्या को लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचकर धरना दिया। बच्चों की मांग थी कि स्कूल तक पहुंचने वाली सड़क को दुरुस्त कराया जाए। प्रदर्शन के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हुए, जिसके बाद यह मामला प्रदेश स्तर पर चर्चा में आया।
उन्नाव में भी शिक्षकों की कमी और विद्यालय में मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता को लेकर छात्र सड़क पर उतरे। प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर छात्रों की समस्याएं सुनीं और जल्द समाधान का भरोसा दिया।
छात्रों की शिकायतों और प्रदर्शन से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने के बाद सरकार ने शिकायतों की निगरानी को भी गंभीरता से लिया है। जिलाधिकारियों और मंडलायुक्तों को सोशल मीडिया पर सामने आने वाली शिक्षण संस्थानों से जुड़ी शिकायतों पर त्वरित संज्ञान लेने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय के स्तर से नोडल अधिकारियों के जरिए समस्याओं की निगरानी और समाधान की व्यवस्था भी की जा रही है।
सरकार का जोर इस बात पर है कि किसी शिक्षण संस्थान में अव्यवस्था या शिक्षकों की कमी को लेकर छात्रों को सड़क पर उतरकर प्रदर्शन करने की नौबत न आए। शासन ने अधिकारियों से समस्याओं की पहचान कर समयबद्ध तरीके से समाधान सुनिश्चित करने को कहा है।
शिक्षण संस्थानों में निरीक्षण और शिकायतों की जांच के दौरान यदि अधिकारियों या कर्मचारियों की लापरवाही सामने आती है तो उनकी जवाबदेही तय किए जाने के संकेत दिए गए हैं। सरकार का संदेश साफ है कि स्कूलों में मूलभूत सुविधाओं, शिक्षकों की उपलब्धता और पढ़ाई की व्यवस्था में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।


