– समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण ने माना शिक्षकों की कमी थी
– आउटसोर्सिंग प्रक्रिया का नवीनीकरण किया गया
लखनऊ। सर्वोदय विद्यालयों में शिक्षकों की कमी को लेकर चल रहे छात्र आंदोलनों के बीच समाज कल्याण राज्यमंत्री असीम अरुण ने माना कि विद्यालयों में शिक्षकों की समस्या थी। मंत्री के अनुसार इस समस्या को फिलहाल सुलझा लिया गया है और जो अतिथि शिक्षक पहले से विद्यालयों में पढ़ा रहे थे, उनका नवीनीकरण कर दिया गया है।
मंत्री ने बताया कि अतिथि शिक्षकों की व्यवस्था आउटसोर्सिंग के माध्यम से संचालित की जा रही थी। इसी व्यवस्था के तहत पहले से कार्यरत शिक्षकों को जारी रखने की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। इस संबंध में औपचारिक आदेश एक-दो दिन में जारी होने की बात कही गई है।
मंत्री के बयान के अनुसार विद्यालयों में वर्तमान में शिक्षण कार्य कर रहे अतिथि शिक्षकों को हटाया नहीं जाएगा। उनका नवीनीकरण होने के बाद वे पहले की तरह विद्यार्थियों को पढ़ाते रहेंगे। इससे उन विद्यार्थियों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो शिक्षकों की कमी के कारण अपनी पढ़ाई प्रभावित होने की शिकायत कर रहे थे।
मंत्री ने इस संबंध में उच्च न्यायालय के एक आदेश का भी हवाला दिया। हालांकि आदेश की पूरी जानकारी और उसकी शर्तों को सार्वजनिक किए जाने के बाद ही इसकी कानूनी स्थिति स्पष्ट होगी।
हालांकि विद्यार्थियों की समस्या पूरी तरह खत्म हुई है या नहीं, यह अभी बड़ा सवाल है। वर्तमान व्यवस्था में पहले से पढ़ा रहे शिक्षकों का नवीनीकरण तो कर दिया गया है, लेकिन जिन विद्यालयों में अभी भी विषयवार शिक्षकों की कमी है, वहां नए अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति कब और कैसे होगी, इस पर फिलहाल स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया है।
यानी पुराने शिक्षकों की सेवाएं जारी रहने से तत्काल संकट कुछ हद तक टल गया है, लेकिन रिक्त पदों और नए शिक्षकों की आवश्यकता का स्थायी समाधान अभी बाकी है।
इस पूरी प्रक्रिया को लेकर एक प्रशासनिक सवाल भी सामने आया है। अतिथि शिक्षकों की व्यवस्था जिस बाहरी संस्था के माध्यम से संचालित की जा रही थी, उसका अनुबंध एक वर्ष के लिए था। अब उसी व्यवस्था का नवीनीकरण किए जाने की बात सामने आई है।
नवीनीकरण की प्रक्रिया और उसके आधार को लेकर सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं क्योंकि अनुबंध की मूल शर्तों में नवीनीकरण का प्रावधान नहीं होने की बात कही जा रही है। ऐसे में यह स्पष्ट किया जाना जरूरी होगा कि बिना नई निविदा प्रक्रिया के अनुबंध का नवीनीकरण किस नियम और किस सक्षम प्राधिकारी के आदेश के आधार पर किया गया।
सर्वोदय विद्यालयों में शिक्षकों की कमी को लेकर विद्यार्थियों की ओर से विरोध और आंदोलन किए जाने के बाद सरकार की ओर से आया यह फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विद्यार्थियों की सबसे बड़ी चिंता थी कि बोर्ड परीक्षाओं से पहले शिक्षकों की कमी के कारण उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो।
फिलहाल सरकार के फैसले से पहले से पढ़ा रहे अतिथि शिक्षकों की सेवाएं जारी रहेंगी और सर्वोदय विद्यालयों में अतिथि शिक्षक व्यवस्था बनी रहेगी। हालांकि नए शिक्षकों की नियुक्ति, विषयवार रिक्तियों और आउटसोर्सिंग अनुबंध के नवीनीकरण की प्रक्रिया पर स्पष्टता आने के बाद ही यह तय होगा कि शिक्षकों की समस्या का स्थायी समाधान हुआ है या फिलहाल केवल तत्काल राहत मिली है।


