कानपुर। पहाड़ों और मैदानी इलाकों में लगातार हो रही बारिश के बीच गंगा नदी के जलस्तर को लेकर चिंता बढ़ने लगी है। कानपुर बैराज से गंगा में 2,95,637 क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद नदी के जलस्तर में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। अधिक मात्रा में पानी छोड़े जाने से कानपुर और आसपास के गंगा तटीय क्षेत्रों में प्रशासन की निगरानी बढ़ गई है।
शुक्लागंज में गंगा का जलस्तर 112.220 मीटर दर्ज किया गया है और नदी चेतावनी बिंदु के करीब पहुंच रही है। जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी होने से गंगा किनारे बसे गांवों और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है।
बैराजों से लगातार छोड़े जा रहे पानी के आंकड़े भी स्थिति की गंभीरता को दर्शाते हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार नरोरा बैराज से 1,15,137 क्यूसेक तथा हरिद्वार बैराज से 1,10,194 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इन बैराजों से छोड़े गए पानी का असर आगे चलकर गंगा के विभिन्न तटीय जिलों में दिखाई पड़ सकता है।
कानपुर बैराज, नरोरा और हरिद्वार से गंगा में छोड़े जा रहे पानी का असर गंगा के प्रवाह क्षेत्र में आने वाले जिलों पर पड़ता है। ऐसे में फर्रुखाबाद समेत गंगा किनारे के जिलों में जलस्तर पर नजर रखना बेहद जरूरी हो गया है। पानी की मात्रा और नदी के बहाव के आधार पर आने वाले समय में जलस्तर में और वृद्धि हो सकती है।
प्रशासन की ओर से निचले इलाकों, तटवर्ती गांवों और संवेदनशील स्थानों पर निगरानी बढ़ाए जाने की जरूरत है। ग्रामीणों को नदी के किनारे जाने से बचने और जलस्तर बढ़ने की स्थिति में प्रशासन की चेतावनी का पालन करने की सलाह दी जा रही है।
गंगा में एक साथ विभिन्न बैराजों से लाखों क्यूसेक पानी छोड़े जाने से नदी के जलस्तर पर दबाव बढ़ना स्वाभाविक है। खासकर निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए अगले कुछ दिन महत्वपूर्ण रहेंगे। सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग द्वारा जलस्तर और डिस्चार्ज की लगातार निगरानी की जा रही है।


