नवाबगंज, फर्रुखाबाद । लगातार हो रही बारिश ने नवाबगंज के मोहल्ला चांदनी स्थित प्राथमिक विद्यालय की व्यवस्था बिगाड़ दी है। विद्यालय परिसर में भारी जलभराव होने से पूरा परिसर तालाब में तब्दील हो गया है। मंगलवार को बच्चों को पानी के बीच से होकर विद्यालय में प्रवेश करना पड़ा। छोटे-छोटे बच्चे ईंटों को रास्ता बनाकर किसी तरह कक्षाओं तक पहुंचते नजर आए।
विद्यालय में करीब 90 बच्चे नामांकित हैं, जबकि प्रतिदिन लगभग 60 से 70 बच्चे विद्यालय में उपस्थित होते हैं। परिसर में पानी भर जाने के कारण बच्चों ने ईंटें रखकर अस्थायी रास्ता तैयार किया है। इसी रास्ते पर पैर रखते हुए बच्चे पानी से बचकर कक्षाओं तक पहुंचने को मजबूर हैं। जलभराव के कारण बच्चों के कपड़े और जूते भीगने का खतरा बना रहता है।
बारिश के पानी ने विद्यालय की सामान्य शैक्षणिक गतिविधियों को भी प्रभावित किया है। परिसर में पानी भरा होने के कारण प्रार्थना सभा तक प्रभावित हो रही है। बच्चों को खेलने और अन्य गतिविधियों के लिए भी पर्याप्त सुरक्षित स्थान नहीं मिल पा रहा है। शिक्षकों को भी विद्यालय संचालन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
सबसे गंभीर बात यह है कि यह समस्या केवल एक दिन की नहीं है। स्थानीय लोगों और विद्यालय प्रशासन के अनुसार बारिश के दौरान हर बार विद्यालय परिसर में जलभराव की स्थिति बन जाती है। जलनिकासी की स्थायी व्यवस्था नहीं होने के कारण पानी लंबे समय तक परिसर में जमा रहता है।
प्रधानाध्यापक कविता ने बताया कि जलभराव की समस्या को लेकर नगर पंचायत को पहले भी अवगत कराया जा चुका है। इसके बावजूद अभी तक जलनिकासी के लिए प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। उनका कहना है कि विद्यालय में बड़ी संख्या में बच्चे पढ़ते हैं और जलभराव के बीच उनका विद्यालय आना-जाना सुरक्षित नहीं है।
मामले में नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी प्रमोद कुमार ने बताया कि उन्हें विद्यालय परिसर में जलभराव की जानकारी नहीं थी। उन्होंने आश्वासन दिया कि जल्द ही पंपिंग सेट भेजकर पानी निकलवाया जाएगा। साथ ही समस्या का स्थायी समाधान कराने का प्रयास किया जाएगा।
बारिश के बीच पानी में ईंटों पर कदम रखते हुए स्कूल पहुंचते बच्चों की तस्वीर नगर पंचायत की जलनिकासी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है। जहां बच्चों के हाथों में किताबें और आंखों में भविष्य के सपने होने चाहिए, वहां उन्हें स्कूल पहुंचने के लिए पानी के बीच ईंटों का सहारा लेना पड़ रहा है। अब देखना यह है कि पंपिंग सेट से अस्थायी राहत कब मिलती है और जलभराव की समस्या के स्थायी समाधान के लिए नगर पंचायत कब ठोस कदम उठाती है।


