आशीष सक्सेना
आज इंटरनेट और सोशल मीडिया हमारी जिंदगी का अभिन्न हिस्सा बन चुके हैं। शिक्षा से लेकर मनोरंजन, समाचार, कारोबार और आपसी संवाद तक लगभग हर क्षेत्र में डिजिटल माध्यमों की भूमिका बढ़ती जा रही है। इंटरनेट ने ज्ञान और अवसरों की दुनिया को हमारे सामने खोल दिया है, लेकिन इसके साथ कई चुनौतियां और जिम्मेदारियां भी जुड़ी हैं। डिजिटल दुनिया में दिखाई देने वाली हर चीज वास्तविक या सही हो, यह जरूरी नहीं। इसलिए इंटरनेट का इस्तेमाल जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी उसका सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग करना भी है।
सबसे पहली जरूरत निजी जानकारी की सुरक्षा है। आज लोग अनजाने में अपना फोन नंबर, घर का पता, स्कूल या कार्यस्थल की जानकारी, पासवर्ड, ओटीपी और यहां तक कि अपनी लाइव लोकेशन भी सोशल मीडिया पर साझा कर देते हैं। ऐसी जानकारी साइबर अपराधियों के लिए उपयोगी हो सकती है। इसलिए जरूरी है कि संवेदनशील जानकारी केवल विश्वसनीय लोगों और सुरक्षित माध्यमों के साथ ही साझा की जाए। मजबूत पासवर्ड बनाए जाएं और जहां संभव हो, दो-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था का इस्तेमाल किया जाए।
सोशल मीडिया पर अनजान लोगों से बातचीत करते समय भी विशेष सावधानी जरूरी है। कोई व्यक्ति इंटरनेट पर जैसा दिखाई देता है, जरूरी नहीं कि वास्तविक जीवन में भी वैसा ही हो। अनजान व्यक्ति द्वारा भेजे गए संदेश, फोटो, लिंक या मिलने के प्रस्ताव को गंभीरता से लेना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति धमकाता है, डराता है या किसी बात को माता-पिता, शिक्षक अथवा परिवार से छिपाने के लिए कहता है, तो ऐसे व्यक्ति से बातचीत रोककर तुरंत किसी भरोसेमंद बड़े को जानकारी देना बेहतर है।
डिजिटल दुनिया में फर्जी खबरों और भ्रामक सामग्री की चुनौती भी लगातार बढ़ रही है। तस्वीरों और वीडियो में बदलाव करना आज बेहद आसान हो गया है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता के दौर में किसी तस्वीर, आवाज या वीडियो को देखकर तुरंत उस पर विश्वास करना और उसे आगे बढ़ा देना कई बार परेशानी पैदा कर सकता है। इसलिए किसी भी महत्वपूर्ण खबर या दावे को साझा करने से पहले उसके स्रोत की विश्वसनीयता जांचना आवश्यक है।
इंटरनेट पर हमारी भाषा और व्यवहार भी हमारी जिम्मेदारी है। सोशल मीडिया पर किसी का मजाक उड़ाना, अपमानजनक टिप्पणी करना, किसी की निजी तस्वीर बिना अनुमति साझा करना या किसी व्यक्ति को लगातार परेशान करना साइबर उत्पीड़न का रूप ले सकता है। हमें यह समझना होगा कि ऑनलाइन दुनिया में भी सामने वाला व्यक्ति हमारी तरह भावनाओं वाला इंसान है। इसलिए डिजिटल व्यवहार में भी वही शालीनता, सम्मान और संवेदनशीलता होनी चाहिए, जो हम आमने-सामने बातचीत में रखते हैं।
बच्चों और किशोरों के लिए यह जिम्मेदारी और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। माता-पिता को बच्चों के इंटरनेट इस्तेमाल पर केवल रोक लगाने के बजाय उन्हें सुरक्षित डिजिटल व्यवहार के बारे में समझाना चाहिए। बच्चों को यह विश्वास दिया जाना चाहिए कि यदि इंटरनेट पर उन्हें कोई डराने वाली, अश्लील, हिंसक या असहज सामग्री दिखाई देती है, तो वे बिना किसी डर के माता-पिता या शिक्षक से बात कर सकते हैं।
इंटरनेट का उपयोग केवल मनोरंजन और समय बिताने तक सीमित नहीं होना चाहिए। यह सीखने और अपनी प्रतिभा विकसित करने का शानदार माध्यम भी है। विज्ञान, भाषा, कला, संगीत, तकनीक और दुनिया भर के ज्ञान तक पहुंच अब कुछ ही क्लिक में संभव है। युवा यदि सोशल मीडिया और इंटरनेट का सकारात्मक उपयोग करें तो वे अपनी रचनात्मकता, कौशल और ज्ञान को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकते हैं।
इसके साथ स्क्रीन टाइम का संतुलन भी बेहद जरूरी है। लगातार मोबाइल या कंप्यूटर पर रहने से पढ़ाई, नींद, खेल और परिवार के साथ बिताया जाने वाला समय प्रभावित हो सकता है। तकनीक हमारे जीवन को आसान बनाने का माध्यम है, जीवन का विकल्प नहीं। इसलिए डिजिटल दुनिया और वास्तविक जीवन के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।
हमें इंटरनेट से डरने की जरूरत नहीं है, बल्कि उसे समझदारी के साथ इस्तेमाल करना सीखना है। डिजिटल सुरक्षा का सरल मंत्र हो सकता है,रुको, सोचो, जांचो और फिर क्लिक करो। किसी लिंक पर क्लिक करने, कोई जानकारी साझा करने या किसी संदेश को आगे भेजने से पहले कुछ क्षण रुककर यह सोचना चाहिए कि इससे कोई नुकसान तो नहीं हो सकता।
आज का स्मार्ट इंटरनेट उपयोगकर्ता वह नहीं है जो सबसे अधिक समय ऑनलाइन बिताता है। वास्तविक समझदारी इस बात में है कि हम तकनीक का उपयोग सुरक्षित, संतुलित, सकारात्मक और जिम्मेदारी के साथ करें। इंटरनेट हमारे लिए ज्ञान और विकास का शक्तिशाली माध्यम बन सकता है, बशर्ते हम इसके लाभों का उपयोग समझदारी से करें और इसके खतरों से सतर्क रहें।
लेखक ग्लोबल इंटरनेट सिस्टम को हैंडल करते हैं।


