प्रयागराज। इलाहाबाद विश्वविद्यालय परिसर में शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर कथित हमले और विश्वविद्यालय प्रशासन की निष्क्रियता के मामले में उत्तर प्रदेश राज्य मानवाधिकार आयोग ने संज्ञान लिया है। आयोग ने पुलिस आयुक्त, प्रयागराज को शिकायतकर्ता/पीड़ित को साथ लेकर छह सप्ताह के भीतर उचित कार्रवाई करने तथा कार्रवाई से शिकायतकर्ता को अवगत कराने के निर्देश दिए हैं।
यह शिकायत समाजवादी छात्रसभा, इलाहाबाद विश्वविद्यालय इकाई के अध्यक्ष आशुतोष मौर्य ने आयोग के समक्ष दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि छात्र अपनी विभिन्न मांगों को लेकर विश्वविद्यालय परिसर में शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से धरना दे रहे थे। इसी दौरान कुछ बाहरी तत्वों ने धरनारत छात्रों पर कथित रूप से हमला कर मारपीट की, जिसमें कई छात्र घायल हुए।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि घटना की जानकारी होने के बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन, विशेषकर चीफ प्रॉक्टर और प्रॉक्टोरियल बोर्ड की ओर से छात्रों की सुरक्षा के लिए समयबद्ध और प्रभावी कदम नहीं उठाए गए। शिकायत में विश्वविद्यालय प्रशासन की जवाबदेही तय करने तथा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की गई थी।
आयोग ने शिकायत में लगाए गए आरोपों का अवलोकन करने के बाद मामले को पुलिस आयुक्त, प्रयागराज को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजा। आयोग ने निर्देश दिया कि शिकायतकर्ता/पीड़ित को साथ लेकर छह सप्ताह के भीतर उचित कार्रवाई की जाए और इसकी जानकारी शिकायतकर्ता को उपलब्ध कराई जाए। आयोग ने इन निर्देशों एवं टिप्पणियों के अधीन शिकायत का निस्तारण किया है।
आशुतोष मौर्य ने कहा कि विश्वविद्यालय परिसर में शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन कर रहे छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करना विश्वविद्यालय प्रशासन की जिम्मेदारी है। उन्होंने मांग की कि जांच में यह स्पष्ट किया जाए कि बाहरी व्यक्तियों को परिसर में प्रवेश कैसे मिला और हमले को रोकने के लिए समय पर क्या कदम उठाए गए।
उन्होंने हमले में शामिल लोगों के खिलाफ विधिसम्मत कार्रवाई, घायल छात्रों को आवश्यक उपचार एवं राहत तथा भविष्य में धरना-प्रदर्शन के दौरान छात्रों की सुरक्षा के लिए प्रभावी सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू किए जाने की मांग की। मौर्य ने कहा कि आयोग के निर्देश के बाद पुलिस प्रशासन को निर्धारित अवधि में निष्पक्ष एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए।


