– ज्ञान फोर्ट स्कूल के सामने मुख्य मार्ग पर फिर गरमाया जमीन विवाद
– हाईकोर्ट में मामला विचाराधीन होने के बावजूद पहुंच गए लोग
– प्रदेश सरकार के मंत्री का रोब दिखा उच्च न्यायालय के अधिवक्ता की ज़मीन पर कब्जे की कोशिश
फर्रुखाबाद। याकूतगंज स्थित ज्ञान फोर्ट स्कूल के सामने मुख्य मार्ग पर एक विवादित जमीन को लेकर समय हड़कंप मच गया, जब कुछ लोगों पर जमीन पर कब्जे की कोशिश करने का आरोप लगा। विवाद बढ़ने पर मौके पर पहुंची पुलिस ने काम रुकवाकर स्थिति को नियंत्रित किया। बताया जा रहा है कि संबंधित भूमि को लेकर उच्च न्यायलय लखनऊ बेंच के अधिवक्ता अवनीश यादव का विवाद पहले से चल रहा है और मामला उच्च न्यायालय, लखनऊ खंडपीठ में विचाराधीन है।
स्थानीय लोगों के अनुसार विवादित भूमि पर पूर्व में भी कब्जे का प्रयास किए जाने की बात सामने आ चुकी है। शनिवार को दोबारा कुछ लोगों के पहुंचने से मौके पर तनाव की स्थिति बन गई। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों को समझाते हुए विवादित स्थल पर किसी भी प्रकार का निर्माण अथवा कब्जे की कार्रवाई रुकवा दी।
इस पूरे प्रकरण में एक और चर्चा स्थानीय स्तर पर तेजी से सामने आई है। आरोप है कि मौके पर पहुंचे कुछ लोगों ने प्रदेश सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री के साथ खिंचवाई गई तस्वीरों को लेकर अपना प्रभाव दिखाने का प्रयास किया। स्थानीय लोगों का कहना है कि मंत्री के साथ तस्वीर होने को आधार बनाकर कुछ लोग अधिकारियों और आम नागरिकों पर रौब गांठने की कोशिश कर रहे हैं।
यदि यह आरोप सही है तो यह गंभीर विषय है, क्योंकि किसी जनप्रतिनिधि के साथ तस्वीर या परिचय को किसी विवादित संपत्ति पर दबाव बनाने का आधार नहीं बनाया जा सकता।
स्थानीय लोगों में यह भी चर्चा है कि कुछ विवादित लोगों द्वारा राजनीतिक प्रभाव का प्रदर्शन किए जाने से संबंधित मंत्री की छवि भी अनावश्यक रूप से प्रभावित हो रही है। किसी व्यक्ति का किसी मंत्री के साथ फोटो होना इस बात का प्रमाण नहीं हो सकता कि उसे सरकारी संरक्षण प्राप्त है।
ऐसे में प्रशासन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि विवादित जमीन पर पहुंचने वाले लोगों को किस आधार पर अधिकार बताया गया और क्या उनके पास भूमि संबंधी कोई वैध दस्तावेज अथवा न्यायालय का आदेश मौजूद था।
स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि इस मामले से जुड़े कुछ लोग पूर्व में भी अन्य विवादों में सामने आ चुके हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। यदि प्रशासन के पास पूर्व के मामलों से संबंधित शिकायतें या मुकदमों का रिकॉर्ड है तो उसकी जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
बड़ा सवाल है कि जब भूमि संबंधी विवाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ में विचाराधीन बताया जा रहा है, तो मौके पर पहुंचकर कब्जे अथवा निर्माण का प्रयास किस अधिकार के तहत किया गया?
कानून-व्यवस्था की दृष्टि से पुलिस द्वारा मौके पर पहुंचकर विवाद को रोकना फिलहाल जरूरी कदम माना जा रहा है। अब निगाहें प्रशासन और न्यायालय की प्रक्रिया पर हैं कि विवादित भूमि के संबंध में वास्तविक अधिकार किसके पक्ष में है।


