‘आई लव समधन’ पर साढ़े 22 लाख खर्च,
लाइटों की खरीद में गड़बड़ी के आरोप
निष्पक्ष जांच की उठी मांग
कन्नौज। नगर पंचायत समधन में स्ट्रीट लाइटों की खरीद और स्थापना को लेकर नगर पंचायत अध्यक्ष आसमां बेगम और अधिशासी अधिकारी दिव्या गुप्ता की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि नियमों और सरकारी प्रक्रिया को दरकिनार कर स्ट्रीट लाइटों के नाम पर लाखों रुपये खर्च किए गए, जबकि मौके पर कई स्थानों पर लाइटें लगी ही नहीं हैं। इसके बावजूद भुगतान किए जाने के आरोपों ने पूरे मामले को सवालों के घेरे में ला दिया है।
नगर पंचायत क्षेत्र में लगाए गए ‘आई लव समधन’ को लेकर भी बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। आरोप है कि इस कार्य पर करीब साढ़े 22 लाख रुपये खर्च किए गए। वहीं दूसरी ओर नगर पंचायत क्षेत्र की कई गलियां रात होते ही अंधेरे में डूब जाती हैं और स्ट्रीट लाइटें समय से नहीं जलने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब सरकारी धन से लाइटों और सौंदर्यीकरण पर लाखों रुपये खर्च हुए तो आम जनता को पर्याप्त रोशनी क्यों नहीं मिल रही,
सबसे गंभीर आरोप यह है कि कुछ लाइटें मौके पर लगी ही नहीं, लेकिन उनके नाम पर सरकारी धन निकाल लिया गया। इसके अलावा घटिया अथवा मानकविहीन लाइटें लगाए जाने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं।
अध्यक्ष आसमां बेगम और ईओ दिव्या गुप्ता के कार्यकाल में हुए इन कार्यों की अब टेंडर प्रक्रिया, कार्यादेश, आपूर्ति बिल, भुगतान अभिलेख और मौके पर लगी लाइटों का भौतिक सत्यापन कराए जाने की मांग उठ रही है। यही जांच बताएगी कि कागजों में कितनी लाइटें खरीदी गईं, कितनी मौके पर लगीं और कितने भुगतान वास्तव में किए गए।
अध्यक्ष और ईओ से जनता का सीधा सवाल है लाखों रुपये खर्च होने के बाद भी समधन की गलियां अंधेरे में क्यों हैं? ‘आई लव समधन’ पर साढ़े 22 लाख रुपये खर्च करने का पूरा हिसाब क्या है? यदि सभी कार्य नियमानुसार हुए हैं तो उनके अभिलेख और मौके का सत्यापन कराने में क्या परेशानी है
अब पूरे मामले में निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच जरूरी हो गई है। जांच में यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं अध्यक्ष और ईओ का पक्ष सामने आने के बाद ही आरोपों की पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी।


