– अप्रैल 2027 तक शुरू होगा 500 बिस्तरों वाला ट्रॉमा-2
किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में मरीजों की सुविधा के लिए जल्द ही कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित संवाद प्रणाली शुरू की जाएगी। इसके लिए एक अलग कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रभाग विकसित किया जाएगा और देश के विशेषज्ञों से भी सलाह ली जाएगी। विश्वविद्यालय प्रशासन के मुताबिक, यह पहल शुरू करने वाला केजीएमयू उत्तर भारत का पहला चिकित्सा संस्थान होगा। इसके माध्यम से मरीज मोबाइल फोन, वेबसाइट या अस्पताल के अनुप्रयोग के जरिए घर बैठे यह जानकारी हासिल कर सकेंगे कि उनकी बीमारी के लिए किस विभाग में जाना है, किस चिकित्सक को दिखाना है और चिकित्सक से मिलने का समय कब उपलब्ध है। आवश्यकता पड़ने पर इसी माध्यम से चिकित्सक का समय भी लिया जा सकेगा। कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद ने बताया कि अपने दूसरे कार्यकाल में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के अधिकतम उपयोग पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
यह कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित संवाद प्रणाली मरीजों और तीमारदारों के लिए डिजिटल सहायक के रूप में काम करेगी। दूर-दराज से आने वाले मरीजों को अक्सर अस्पताल में संबंधित विभाग, बाह्य रोगी विभाग, प्रयोगशाला, एक्स-रे, एमआरआई, आकस्मिक चिकित्सा विभाग और औषधालय खोजने में परेशानी होती है। नई व्यवस्था के माध्यम से उन्हें इन सभी स्थानों की जानकारी के साथ संबंधित विभाग के समय और चिकित्सक की उपलब्धता भी मिल सकेगी। इससे मरीजों का समय बचेगा और अस्पताल परिसर में अनावश्यक भीड़ कम करने में मदद मिलेगी। कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद को 9 अगस्त को लगातार दूसरे कार्यकाल की जिम्मेदारी दी गई है।
केजीएमयू में ट्रॉमा-2 का निर्माण भी तेजी से चल रहा है और इसे अप्रैल 2027 तक शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। करीब 275 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रहे इस नए ट्रॉमा केंद्र में 500 बिस्तरों पर गंभीर मरीजों के इलाज की सुविधा होगी। वर्तमान में लगभग 400 बिस्तरों की क्षमता वाले ट्रॉमा-1 में कई बार 500 से अधिक मरीज भर्ती रहते हैं और सीमित संसाधनों के कारण बड़ी संख्या में मरीजों को स्ट्रेचर पर इलाज कराना पड़ता है। ट्रॉमा-2 शुरू होने के बाद दोनों केंद्रों के बीच मरीजों का दबाव बांटा जा सकेगा, जिससे गंभीर मरीजों को समय पर बिस्तर मिलने और बेहतर उपचार व्यवस्था की उम्मीद है।
ट्रॉमा-2 के संचालन के लिए केजीएमयू प्रशासन ने अभी से मानव संसाधन की तैयारी शुरू कर दी है। चिकित्सकों, आवासीय चिकित्सकों, स्टाफ नर्स, पैरामेडिकल कर्मचारियों और अन्य श्रेणियों के करीब 1750 पदों पर भर्ती का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इसे मंजूरी के लिए उच्च अधिकारियों को भेजा जाएगा और स्वीकृति मिलने के बाद भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। केजीएमयू के प्रवक्ता डॉ. केके सिंह के अनुसार, नए ट्रॉमा केंद्र के शुरू होने से सड़क हादसों, गंभीर चोट और अन्य आपात स्थितियों वाले मरीजों के लिए उपचार क्षमता बढ़ेगी। इससे मरीजों को बिस्तर के लिए भटकने और लंबे समय तक स्ट्रेचर पर इंतजार करने की समस्या से राहत मिलने की उम्मीद है।


