
प्रधानाचार्या पर ग्रामीणों ने लगाए गंभीर आरोप, विद्यालय में सिलेंडर बेचने का भी दावा; जांच और कार्रवाई की मांग
अमृतपुर। विकासखंड राजेपुर क्षेत्र के बिरसिंहपुर स्थित जूनियर विद्यालय का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विद्यालय की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। वायरल वीडियो में विद्यालय परिसर में बच्चों के हाथों में कुल्हाड़ी दिखाई देने और उनके द्वारा लकड़ी काटे जाने का दावा किया जा रहा है। वीडियो सामने आने के बाद ग्रामीणों में नाराजगी है। ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराकर दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
ग्रामीणों ने विद्यालय की प्रधानाचार्या श्रीमती नीलम पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि विद्यालय में बच्चों को पढ़ाई कराने के बजाय उनसे ऐसे कार्य कराए जा रहे हैं, जिनमें उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
ग्रामीणों के मुताबिक वायरल वीडियो में बच्चे विद्यालय परिसर में लकड़ी काटते नजर आ रहे हैं। यदि जांच में वीडियो की पुष्टि होती है और यह सामने आता है कि बच्चों से वास्तव में कुल्हाड़ी चलवाकर लकड़ी कटवाई गई, तो यह विद्यालय प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल होगा।
ग्रामीणों का कहना है कि विद्यालय में आने वाले बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी विद्यालय प्रशासन की है। ऐसे में बच्चों के हाथ में धारदार औजार दिए जाने के मामले की गंभीरता से जांच होनी चाहिए।
मामले ने उस समय और गंभीर रूप ले लिया जब ग्रामीणों ने विद्यालय में उपलब्ध गैस सिलेंडरों को बेच दिए जाने का भी आरोप लगाया। ग्रामीणों का दावा है कि विद्यालय में उपलब्ध संसाधनों के संबंध में भी जांच की आवश्यकता है।
हालांकि सिलेंडर बेचने सहित लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। इसलिए पूरे मामले में विभागीय जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
मामले में ग्राम सभा बिरसिंहपुर के ग्राम प्रधान की ओर से भी प्रधानाचार्या के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए गए हैं। ग्राम प्रधान के मुताबिक वह एक बार विद्यालय गए थे। उनका आरोप है कि प्रधानाचार्या ने उनके अनुसूचित जाति से होने के कारण कथित रूप से अपमानित किया।
ग्राम प्रधान का यह भी आरोप है कि बाद में उनके घर पहुंचकर उनके साथ कथित तौर पर गाली-गलौज की गई। ग्राम प्रधान ने इन आरोपों की भी जांच कराकर आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।
इन आरोपों की भी अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि घटनाक्रम की वास्तविकता क्या है और आरोपों में कितनी सच्चाई है।
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद शिक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि विद्यालयों में बच्चों की पढ़ाई के साथ उनकी सुरक्षा भी सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
यदि वायरल वीडियो की जांच में यह साबित होता है कि बच्चों से खतरनाक औजार के जरिए लकड़ी कटवाई गई, तो जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही विद्यालय में उपलब्ध सरकारी संसाधनों की भी जांच कराए जाने की मांग उठ रही है।


