दिलीप की मड़ैया में तबाही का मंजर, ईंट-सरिया निकालकर बैलगाड़ियों और मोटरबोट से सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रहे सामान
फर्रुखाबाद। गंगा नदी में लगातार बढ़ते जलस्तर और तेज कटान ने जिले के कटरी क्षेत्र में तबाही मचा दी है। बढ़पुर विकासखंड क्षेत्र के दिलीप की मड़ैया और दौली की मड़ैया गांवों में ग्रामीणों के सामने अपने आशियाने बचाने का संकट खड़ा हो गया है। दिलीप की मड़ैया में पिछले पांच दिनों के भीतर 17 मकान गंगा की धारा में समा चुके हैं। शनिवार को भी पांच पक्के मकान कटान की चपेट में आकर नदी में बह गए। हालात इतने भयावह हैं कि ग्रामीण अब गंगा के घरों को निगलने का इंतजार करने के बजाय अपने हाथों से मकान तोड़कर ईंट, सरिया और दूसरी निर्माण सामग्री निकाल रहे हैं।
गंगा के लगातार बढ़ते जलस्तर के बीच गांव में कटान की रफ्तार तेज होती जा रही है। शनिवार को नरवीर का मकान भी कटान की चपेट में आ गया। इसके बाद ग्रामीणों में अफरा-तफरी मच गई। दिनभर लोग अपने-अपने घरों से जरूरी सामान और निर्माण सामग्री निकालने में जुटे रहे। मकानों से निकाली गई ईंटें, सरिया और अन्य सामान बैलगाड़ियों और मोटरबोट के माध्यम से सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा रहा है।
शाम को तेज हुआ कटान, देखते ही देखते बह गए पांच मकान
ग्रामीणों के मुताबिक शनिवार शाम करीब चार बजे के बाद गंगा की धारा ने कटान और तेज कर दिया। कुछ ही देर में स्वर्गीय गंगा सिंह की पत्नी प्रेमलता, प्रेमचंद्र, उनके पुत्र श्याम और राजेश के पक्के मकान भी नदी की धारा में समा गए। मकानों के नदी में समाने से ग्रामीणों के सामने रहने का संकट और गहरा गया है।
गांव में अब लगभग हर परिवार अपने मकान को लेकर चिंतित है। जिन मकानों के आसपास कटान शुरू हो चुका है, उनके परिवार सुरक्षित स्थान की तलाश में जुटे हैं। कई ग्रामीणों ने मजबूरी में मकानों को खुद तोड़ना शुरू कर दिया है, ताकि कम से कम घर बनाने में लगी मेहनत की कुछ निशानी और निर्माण सामग्री बचाई जा सके।
एक गली का हिस्सा ही बचा सूखा, घरों में चूल्हे जलाना भी मुश्किल
बाढ़ और कटान के कारण गांव की स्थिति बेहद खराब हो गई है। ग्रामीणों के अनुसार गांव की एक गली का कुछ हिस्सा ही अब सूखा बचा है। अधिकांश घरों में पानी और कटान के चलते खाना पकाने तक की जगह नहीं बची है। घरों के आसपास पानी भरने से लोगों का सामान्य जीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है।
पशुओं की स्थिति भी खराब है। खूंटों पर बंधे पशुओं के लिए चारे और भोजन की व्यवस्था करना ग्रामीणों के लिए मुश्किल हो रहा है। एक तरफ लोग अपने परिवार और पशुओं को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ घरों से ईंट, सरिया, अनाज, कपड़े और जरूरी सामान निकालने में जुटे हैं।
जिस घर को वर्षों की मेहनत से बनाया, उसे खुद तोड़ने की मजबूरी
ग्रामीणों का कहना है कि जिन मकानों को बनाने में उनकी वर्षों की मेहनत और जीवनभर की जमा-पूंजी लगी थी, आज उन्हीं मकानों को अपने हाथों से तोड़ना पड़ रहा है। उनका कहना है कि गंगा की धारा कब किस मकान को अपनी चपेट में ले ले, इसका कोई भरोसा नहीं है।
एक ग्रामीण ने दर्द बयां करते हुए कहा कि बर्बादी तो हो ही चुकी है, अब कम से कम घर की ईंट और सरिया ही बच जाए, यही कोशिश है। ग्रामीणों के मुताबिक किसी ने पिछले साल तो किसी ने दो साल पहले ही मकान बनवाया था। अब उन्हीं मकानों को अपने हाथों से गिराते समय परिवारों का कलेजा कांप रहा है।
मोटरबोट से गांव पहुंचीं नीरज, चाची से की मुलाकात
इसी बीच शहर के मोहल्ला अमीन खां में रहने वाली नीरज शनिवार को मोटरबोट के जरिए गांव पहुंचीं। वह अपने चाचा के परिवार से मिलने आई थीं। उन्होंने अपनी चाची संतोषी देवी से मुलाकात की और गांव के हालात देखे।
नीरज ने बताया कि पिछले साल आई बाढ़ में उनके पिता का मकान गिर गया था। उनके भाई राममूर्ति की भी मौत हो चुकी है। उनकी मां और भाभी वर्तमान में कटरी धर्मपुर गोशाला के पास सड़क किनारे झोपड़ी बनाकर रहने को मजबूर हैं। उन्होंने बताया कि उनके चाचा का मकान भी इस समय कटान के मुहाने पर है।
17 मकान नदी में समाए, बचे घरों पर भी खतरा
ग्रामीणों के मुताबिक पिछले पांच दिनों में अकेले दिलीप की मड़ैया में 17 मकान गंगा में समा चुके हैं। कुछ मकान अभी बचे हैं, लेकिन उनके आसपास भी कटान तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में परिवारों को आशंका है कि जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो बचे हुए मकान भी सुरक्षित नहीं रहेंगे।
ग्रामीणों का कहना है कि उनके पास मकानों को बचाने का कोई प्रभावी विकल्प नहीं है। प्रशासन और राहत व्यवस्था से उम्मीद लगाए बैठे ग्रामीण फिलहाल खुद ही अपने सामान को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने में जुटे हैं। बैलगाड़ियां और मोटरबोट उनके लिए इस समय सबसे बड़ा सहारा बनी हुई हैं।
प्रशासन के सामने चुनौती, राहत और सुरक्षित स्थान की दरकार
गंगा के बढ़ते जलस्तर और कटान ने कटरी क्षेत्र के ग्रामीणों के सामने गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। मकानों के लगातार नदी में समाने के कारण प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाना, भोजन-पानी उपलब्ध कराना और पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था करना प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती है।
ग्रामीणों की मांग है कि कटान प्रभावित परिवारों को तत्काल सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराया जाए। साथ ही उनके जरूरी सामान को निकालने और सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने में प्रशासन की ओर से मदद दी जाए, ताकि वर्षों की मेहनत से जुटाई गई उनकी बची हुई संपत्ति भी गंगा की धारा में न समा जाए।


