नई दिल्ली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ई-20 पेट्रोल को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। शुक्रवार को जारी करीब 53 सेकेंड के वीडियो में राहुल गांधी एक कार की पेट्रोल टंकी खोलकर उसके ढक्कन पर लिखे ‘ई-20’ को दिखाते नजर आए। उन्होंने ई-20 ईंधन पर सवाल उठाते हुए कहा कि इससे लोगों की कार और स्कूटर खराब हो रहे हैं और इसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ रहा है।
राहुल गांधी ने कहा, “आम तौर पर हम कहते हैं कि दाल में काला है, लेकिन यहां तो पूरी दाल ही काली है।” उन्होंने आरोप लगाया कि देश में भ्रष्टाचार की एक लंबी श्रृंखला है और ई-20 ईंधन भी उसी का एक मामला है। उनके मुताबिक ई-20 के कारण वाहनों की हालत प्रभावित हो रही है और लोगों को अतिरिक्त रखरखाव का खर्च उठाना पड़ रहा है।
हालांकि, केंद्र सरकार ने ई-20 को लेकर उठाए जा रहे सवालों को खारिज किया है। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि भारत का जैव ईंधन मिश्रण कार्यक्रम बेहतर तरीके से काम कर रहा है और कुछ लोग ई-20 को लेकर बेवजह विवाद पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। सरकार का कहना है कि पेट्रोल में मिलाया जाने वाला एथेनॉल घरेलू स्रोतों से प्राप्त किया जा रहा है।
2023 से पहले की गाड़ियों को लेकर चिंता
भारत में 20 प्रतिशत एथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल के मिश्रण वाले ई-20 ईंधन को लेकर खासतौर पर 2023 से पहले निर्मित पेट्रोल वाहनों के मालिकों में चिंता देखी जा रही है। वाहन मालिकों का दावा है कि ई-20 से माइलेज कम होने, रखरखाव खर्च बढ़ने और कुछ इंजन हिस्सों पर अतिरिक्त असर पड़ने जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं। हालांकि, इन दावों को लेकर वाहन, ईंधन और वाहन की अनुकूलता के आधार पर प्रभाव अलग-अलग हो सकता है।
सरकार के सामने तीन बड़े तर्क
सरकार ने एथेनॉल मिश्रण बढ़ाने के पीछे ऊर्जा सुरक्षा, कच्चे तेल के आयात में कमी और विदेशी मुद्रा की बचत को प्रमुख कारण बताया है। इसके अलावा गन्ने, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से एथेनॉल तैयार होने के कारण किसानों के लिए अतिरिक्त आय का अवसर बनने तथा कार्बन उत्सर्जन घटाने की उम्मीद भी जताई गई है।
ई-20 के विरोध में आम आदमी पार्टी का अभियान
ई-20 के विरोध में आम आदमी पार्टी ने देशभर में जनसंवाद अभियान शुरू करने की घोषणा की है। पार्टी के अनुसार 8 अगस्त से विभिन्न राज्यों में नगर संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों के जरिए वाहन मालिकों से ई-20 पेट्रोल से जुड़ी समस्याओं और उनके अनुभवों की जानकारी जुटाई जाएगी।
ई-20 को लेकर अब सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक बहस तेज होती दिखाई दे रही है। एक ओर सरकार इसे ऊर्जा सुरक्षा और आयात निर्भरता घटाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बता रही है, वहीं विपक्ष पुराने वाहनों पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव और आम वाहन मालिकों के बढ़ते खर्च को मुद्दा बना रहा है।


