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Friday, August 7, 2026

मोदी से मिले सुखबीर बादल, पंजाब में फिर साथ आ सकते हैं अकाली दल-भाजपा

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चंडीगढ़/नई दिल्ली। पंजाब विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले राज्य की सियासत में बड़े राजनीतिक गठजोड़ के संकेत मिलने लगे हैं। शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने शुक्रवार को दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। संसद भवन में दोनों नेताओं के बीच करीब 40 से 45 मिनट तक बातचीत हुई। इससे पंजाब में एक बार फिर अकाली दल और भारतीय जनता पार्टी के साथ आने की अटकलें तेज हो गई हैं।

प्रधानमंत्री से मुलाकात से पहले सुखबीर बादल ने हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से भी मुलाकात की। हालांकि, दोनों दलों की ओर से अभी तक गठबंधन को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन शीर्ष नेतृत्व के बीच हुई इस मुलाकात को पंजाब की आगामी चुनावी राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

केजरीवाल ने कसा तंज

मोदी और सुखबीर बादल की मुलाकात पर आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने तंज कसा। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, “ना ना करते प्यार तुम्हीं से कर बैठे…” और दोनों दलों के संभावित गठबंधन को लेकर सवाल उठाया।

जवाब में सुखबीर बादल ने पंजाब में अवैध खनन को लेकर आम आदमी पार्टी सरकार पर निशाना साधा और उसके पुराने दावों को लेकर सवाल खड़े किए। वहीं कांग्रेस नेता प्रताप सिंह बाजवा ने भी संभावित गठबंधन पर टिप्पणी करते हुए कहा कि उन्हें पहले से लगता था कि दोनों दल फिर साथ आएंगे, लेकिन इससे राजनीतिक स्थिति में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा।

25 साल चला था अकाली-भाजपा गठबंधन

पंजाब में अकाली दल और भाजपा का गठबंधन वर्ष 1996 में हुआ था और करीब 25 वर्षों तक दोनों दल साथ रहे। इस गठबंधन ने 1997, 2007 और 2012 में सरकार बनाई। वर्ष 2012 में दोनों दलों ने लगातार दूसरी बार सत्ता हासिल कर पंजाब की राजनीति में नया इतिहास बनाया था।

गठबंधन के दौरान अकाली दल ग्रामीण और पंथक क्षेत्रों में मजबूत माना जाता था, जबकि भाजपा का प्रभाव मुख्य रूप से शहरी क्षेत्रों में था। सीटों के बंटवारे और दोनों दलों के अलग-अलग जनाधार को गठबंधन की बड़ी ताकत माना जाता था।

2020 में टूटा गठबंधन, 2022 में दोनों कमजोर

कृषि कानूनों को लेकर वर्ष 2020 में भाजपा और अकाली दल का करीब ढाई दशक पुराना गठबंधन टूट गया था। इसके बाद दोनों दलों ने 2022 का विधानसभा चुनाव अलग-अलग लड़ा और दोनों का प्रदर्शन कमजोर रहा। वहीं आम आदमी पार्टी ने भारी बहुमत हासिल कर पंजाब में सरकार बनाई।

अब 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले यदि अकाली दल और भाजपा फिर एक साथ आते हैं तो पंजाब में चुनावी समीकरण बड़े पैमाने पर बदल सकते हैं। इससे आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के सामने भी नई राजनीतिक चुनौती खड़ी होने की संभावना है।

हालांकि, फिलहाल दोनों दलों के बीच गठबंधन को लेकर अंतिम फैसला या औपचारिक घोषणा सामने नहीं आई है।

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