लखनऊ। उत्तर प्रदेश में मानसून पूरी तरह सक्रिय हो गया है। लगातार हो रही बारिश और पहाड़ी क्षेत्रों से छोड़े गए पानी के कारण प्रदेश के कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। गंगा, सरयू, घाघरा और यमुना समेत कई नदियां उफान पर हैं। बाढ़ और बारिश से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। मौसम विभाग ने शुक्रवार के लिए प्रदेश के सभी 75 जिलों में वर्षा का अलर्ट जारी किया है, जिनमें 18 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी दी गई है।
सबसे अधिक प्रभावित जिलों में फर्रुखाबाद शामिल है, जहां गंगा का जलस्तर खतरे के निशान के करीब पहुंच गया है। जिले के 33 गांव और 40 सरकारी स्कूल बाढ़ के पानी से घिर गए हैं। कई संपर्क मार्ग जलमग्न हैं और कुछ स्थानों पर सड़क के ऊपर से पानी बह रहा है। जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर ने नाव से बाढ़ प्रभावित गांवों का दौरा कर राहत एवं बचाव कार्यों का जायजा लिया तथा अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए।
बलिया में सरयू नदी का कटान लगातार जारी है। गुरुवार को तीन और मकान नदी में समा गए, जबकि पिछले एक सप्ताह में 27 मकान नदी की धारा में विलीन हो चुके हैं। वाराणसी में गंगा के बढ़ते जलस्तर से घाटों के किनारे बने 40 से 50 छोटे मंदिर जलमग्न हो गए हैं और प्रसिद्ध रत्नेश्वर महादेव मंदिर आधे से अधिक पानी में डूब गया है।
बारिश के कारण कई जिलों में हादसे भी हुए। बाराबंकी में जर्जर दीवार गिरने से मदरसे जा रहे भाई-बहन की मौत हो गई, जबकि तीन बच्चे घायल हो गए। प्रतापगढ़ में 100 वर्ष पुराना मकान ढहने से एक ही परिवार के छह लोगों की जान चली गई। देवरिया में तालाब में डूबने से एक राजमिस्त्री की मौत हो गई।
लगातार वर्षा के चलते प्रयागराज और कौशांबी में कक्षा एक से आठ तक के सभी विद्यालय बंद कर दिए गए हैं। आगरा, वाराणसी, मथुरा, रायबरेली, जौनपुर और अयोध्या समेत कई शहरों में जलभराव से जनजीवन प्रभावित रहा। वाराणसी, मेरठ, सहारनपुर और लखनऊ सहित अनेक जिलों में सड़कों पर पानी भरने से यातायात भी बाधित हुआ।
मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में अगले चार से पांच दिनों तक झमाझम बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। प्रशासन ने नदी किनारे रहने वाले लोगों से सतर्क रहने, अनावश्यक यात्रा से बचने तथा बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में विशेष सावधानी बरतने की अपील की है।


