– लोकतंत्र में सहमति-असहमति स्वाभाविक
– लेकिन सम्मान जरूरी
लखनऊ। विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने सदन की कार्यवाही और लोकतांत्रिक परंपराओं को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में मतभेद और असहमति स्वाभाविक हैं, लेकिन सदन की गरिमा और उसके सदस्यों का सम्मान हर परिस्थिति में बना रहना चाहिए।
सतीश महाना ने कहा, “सदन के नेता का सम्मान होना चाहिए। सहमति-असहमति लोकतंत्र का अंग है, लेकिन सदन के सदस्य का सम्मान हो। कल की घटना को लेकर मुझे दुख हुआ।”
उन्होंने सभी दलों के विधायकों से आग्रह किया कि वे विधानसभा की गरिमा, संसदीय परंपराओं और लोकतांत्रिक मूल्यों का पालन करें। उनका कहना था कि जनता अपने निर्वाचित प्रतिनिधियों से गंभीर और मर्यादित आचरण की अपेक्षा करती है।
विधानसभा अध्यक्ष का यह बयान सदन में हाल ही में हुए घटनाक्रम के संदर्भ में आया है। हालांकि उन्होंने किसी दल या सदस्य का नाम नहीं लिया, लेकिन स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में स्वस्थ बहस और विरोध का पूरा अधिकार है, बशर्ते सदन की मर्यादा और सभी सदस्यों का सम्मान बना रहे। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में सभी सदस्य संसदीय परंपराओं का पालन करते हुए सदन की गरिमा बनाए रखेंगे।


