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Tuesday, August 4, 2026

पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की भतीजी रचना सिंह ने खोला मोर्चा

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– जयप्रभा गेस्ट हाउस पर अवैध कब्जे का आरोप, विरासत बचाने की उठाई आवाज
– प्रो. एच.एन. शर्मा ने दिया समर्थन

लखनऊ/नई दिल्ली। पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की विरासत को लेकर अब उनके परिवार ने भी खुलकर मोर्चा खोल दिया है। उनकी भतीजी रचना सिंह ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री संजय प्रसाद से मिलकर कार्यवाही के लिये पत्र दिया जयप्रभा गेस्ट हाउस, चंद्रशेखर नगर (बलिया) पर अवैध कब्जे का आरोप लगाते हुए तत्काल कड़ी कार्रवाई की मांग की है। इस पहल को पूर्व प्रधानमंत्री के पूर्व राजनीतिक सलाहकार प्रो. एच.एन. शर्मा का भी समर्थन मिला है। उन्होंने चंद्रशेखर की झोपड़ी के सामने जय प्रभा गेस्ट हॉउस पर कब्ज़ा होने की निंदा की।

रचना सिंह ने अपने ज्ञापन में कहा है कि जयप्रभा गेस्ट हाउस का निर्माण सांसद निधि से जयप्रकाश मेमोरियल ट्रस्ट के माध्यम से कराया गया था। इसका उद्देश्य बलिया आने वाली महिलाओं और बच्चों को सुरक्षित आवास उपलब्ध कराना था। गेस्ट हाउस का उद्घाटन 23 मार्च 2003 को तत्कालीन उपराष्ट्रपति भैरों सिंह शेखावत ने पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर और पूर्व रेल मंत्री दिग्विजय सिंह की उपस्थिति में किया था।

‘विरासत पर कब्जे का प्रयास स्वीकार नहीं’

रचना सिंह ने आरोप लगाया है कि चंद्रशेखर के निधन के बाद गेस्ट हाउस पर अवैध कब्जा कर लिया गया और उद्घाटन से जुड़ा शिलापट्ट भी हटा दिया गया। उन्होंने इसे केवल संपत्ति का विवाद नहीं, बल्कि पूर्व प्रधानमंत्री की स्मृतियों और राष्ट्रीय विरासत से जुड़ा गंभीर मामला बताया है।

पूर्व राजनीतिक सलाहकार प्रो. एच.एन. शर्मा ने भी इस मांग का समर्थन करते हुए कहा कि यदि किसी सार्वजनिक ट्रस्ट या उससे जुड़ी संपत्ति पर अनधिकृत कब्जे या अनियमितता के आरोप हैं, तो उनकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रनायकों की धरोहर का संरक्षण शासन और समाज दोनों की जिम्मेदारी है।

रचना सिंह ने मुख्य सचिव से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, यदि अवैध कब्जे की पुष्टि होती है तो परिसर को कब्जामुक्त कराया जाए और जयप्रभा गेस्ट हाउस को उसके मूल उद्देश्य के अनुरूप पुनः संचालित किया जाए। ज्ञापन की प्रति मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी भेजी गई है।

अब इस मामले में शासन की प्रतिक्रिया और संभावित कार्रवाई पर सबकी निगाहें टिकी हैं।

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