विधानसभा व विधानपरिषद सचिवालय में भर्ती के नाम पर पहले भी होता रहा है विवाद
लखनऊ।
मूल रूप से जौनपुर निवासी और वर्तमान में मुंबई में रहने वाले विमल प्रेमचंद गौर ने हज़रतगंज थानाध्यक्ष तथा पुलिस आयुक्त लखनऊ को दिए गए शिकायती पत्र में उत्तर प्रदेश विधानसभा में अनुभाग अधिकारी के पद पर तैनात अपने सगे चाचा सुबास चंद्र के विरुद्ध नौकरी दिलाने के नाम पर कुल 13 लाख रुपये हड़पने का गंभीर आरोप लगाया है।
शिकायती पत्र के अनुसार, कुल 13 लाख रुपये में से 6 लाख रुपये विमल प्रेमचंद गौर के मित्र अजय कुमार निर्मल ने तथा 7 लाख रुपये स्वयं विमल प्रेमचंद गौर ने दिए थे। आरोप है कि इनमें से 2 लाख रुपये सुबास चंद्र ने अपने किसी शिवसागर नामक सहयोगी के खाते में मंगवाए थे। विमल प्रेमचंद गौर का कहना है कि उन्होंने समस्त लेनदेन तथा बैंकिंग रिकॉर्ड से संबंधित साक्ष्य भी अपनी तहरीर के साथ पुलिस को उपलब्ध कराए हैं।
प्रार्थना पत्र में विमल प्रेमचंद गौर ने आरोप लगाया है कि सुबास चंद्र, जो उत्तर प्रदेश विधानसभा में अनुभाग अधिकारी के पद पर तैनात हैं, स्वयं को विधानसभा के प्रमुख सचिव प्रदीप दुबे का अत्यंत करीबी बताते थे तथा भर्ती प्रक्रिया का कर्ताधर्ता होने का दावा करते थे।
शिकायत के अनुसार, जब विमल प्रेमचंद गौर ने 7 अगस्त 2025 को अपने पैसे वापस मांगे तो सुबास चंद्र ने उन्हें गाली-गलौज की तथा लखनऊ तक खींच लाने की धमकी दी। इसके बाद 11 फरवरी 2026 को भी उन्हें पुनः धमकी दिए जाने का आरोप लगाया गया है।
विमल प्रेमचंद गौर का कहना है कि उन्होंने सुबास चंद्र को कानूनी नोटिस भी भिजवाया था, लेकिन सुबास चंद्र ने न तो नोटिस का कोई जवाब दिया और न ही उनकी धनराशि वापस की।
ज्ञात हो कि उत्तर प्रदेश की विधानसभा और विधान परिषद दोनों ही विभिन्न विवादों में रहे हैं। भर्ती प्रक्रिया एवं अन्य मामलों को लेकर कई मुकदमे उच्च न्यायालय में लंबित हैं। विधानसभा के प्रमुख सचिव प्रदीप दुबे की नियुक्ति को फर्जी बताते हुए एक याचिका लखनऊ हाई कोर्ट में दाखिल की गई है। भर्ती मामले में कथित घोटाले के संबंध में लखनऊ हाई कोर्ट द्वारा सीबीआई जांच का आदेश भी दिया जा चुका है और यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है।
आरोप यह भी लगाए जाते रहे हैं कि विधानसभा के प्रमुख सचिव प्रदीप दुबे के रिश्तेदारों को विधान परिषद में नौकरी दी गई है तथा विधान परिषद के प्रमुख सचिव राजेश सिंह के रिश्तेदारों को विधानसभा में नौकरी दी गई है। इनसे संबंधित सूची और पहचान पत्र समय-समय पर सोशल मीडिया पर वायरल होने के दावे भी किए जाते रहे हैं।
फिलहाल पुलिस को दिए गए शिकायती पत्र के आधार पर मामले में विधिक कार्रवाई की मांग की गई है। समाचार लिखे जाने तक पुलिस की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान या एफआईआर दर्ज होने की बात नहीं आई है लेकिन सचिवालय चौकी इंचार्ज बागेश शर्मा के अनुसार तहरीर मिली है जांच की जा रही है। मामले में विधि सम्मत कार्यवाही की जायेगी।


