– देश के अग्रणी न्यूरोसर्जन प्रो. (डॉ.) राज कुमार से दैनिक यूथ इंडिया के मुख्य संपादक शरद कटियार की विशेष बातचीत
लखनऊ।भारतीय चिकित्सा जगत में जब न्यूरोसर्जरी, चिकित्सा अनुसंधान और स्वास्थ्य शिक्षा की बात होती है तो प्रो. (डॉ.) राज कुमार का नाम अग्रणी विशेषज्ञों में लिया जाता है। हजारों जटिल न्यूरोसर्जरी, सैकड़ों शोधपत्र, अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मान और चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में दशकों का अनुभव उन्हें देश के सबसे प्रतिष्ठित न्यूरोसर्जनों में स्थापित करता है। वर्तमान में वे राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (रिम्स), रांची के निदेशक-सह-सीईओ के रूप में स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा दे रहे हैं। इससे पूर्व वे एसजीपीजीआई, लखनऊ के एपेक्स ट्रॉमा सेंटर के संस्थापक प्रमुख, एम्स ऋषिकेश के संस्थापक निदेशक तथा यूपी यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज, सैफई के कुलपति जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा चुके हैं।
दैनिक यूथ इंडिया के मुख्य संपादक शरद कटियार ने प्रो. (डॉ.) राज कुमार से चिकित्सा, शोध, नई स्वास्थ्य नीति, युवा डॉक्टरों की चुनौतियों, आधुनिक तकनीक और समाज सेवा सहित कई महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से बातचीत की। प्रस्तुत हैं इस विशेष साक्षात्कार के प्रमुख अंश,,
प्रश्न: आपने चिकित्सा क्षेत्र में लंबा और गौरवशाली सफर तय किया है। आज जब पीछे मुड़कर देखते हैं तो सबसे बड़ी उपलब्धि क्या मानते हैं?
उत्तर (प्रो. डॉ. राज कुमार):
मेरे लिए सबसे बड़ी उपलब्धि कोई पद या पुरस्कार नहीं बल्कि वे हजारों मरीज हैं जिन्हें स्वस्थ जीवन मिला। यदि किसी मरीज के चेहरे पर मुस्कान लौट आती है तो वही मेरे लिए सबसे बड़ा सम्मान है। चिकित्सा सेवा ईश्वर की सबसे बड़ी सेवा है और मैंने हमेशा इसे मिशन की तरह किया है।
प्रश्न: न्यूरोसर्जरी को चिकित्सा का सबसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्र माना जाता है। इसकी सबसे बड़ी चुनौती क्या है?
उत्तर:मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी से जुड़े ऑपरेशन अत्यंत संवेदनशील होते हैं। यहां एक छोटी सी गलती भी गंभीर परिणाम दे सकती है। इसलिए ज्ञान, अनुभव, धैर्य और आधुनिक तकनीक का समन्वय बहुत आवश्यक है। मरीज और उसके परिवार का विश्वास भी डॉक्टर की सबसे बड़ी जिम्मेदारी होता है।
प्रश्न: आपने लगभग दस हजार जटिल न्यूरोसर्जरी की हैं। क्या कोई ऐसा मामला है जिसे आप आज भी याद करते हैं?
उत्तर:हर मरीज अपने आप में विशेष होता है। कई ऐसे मरीज आए जिन्हें बेहद गंभीर स्थिति में लाया गया, लेकिन सफल ऑपरेशन के बाद वे सामान्य जीवन जीने लगे। ऐसे क्षण डॉक्टर के पूरे जीवन की सबसे बड़ी प्रेरणा बन जाते हैं।
प्रश्न: चिकित्सा अनुसंधान में आपका योगदान काफी बड़ा रहा है। रिसर्च कितनी जरूरी है?
उत्तर:अगर रिसर्च नहीं होगी तो चिकित्सा विज्ञान आगे नहीं बढ़ेगा। नई दवाइयां, नई तकनीक और बेहतर उपचार सभी शोध का परिणाम हैं। इसलिए युवा डॉक्टरों को मरीज देखने के साथ-साथ शोध कार्य में भी सक्रिय रहना चाहिए।
प्रश्न: भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था में अभी सबसे बड़ी जरूरत क्या है?
उत्तर:ग्रामीण क्षेत्रों तक आधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना सबसे बड़ी आवश्यकता है। डॉक्टरों की संख्या बढ़ानी होगी, मेडिकल शिक्षा को मजबूत करना होगा और तकनीक का अधिक से अधिक उपयोग करना होगा। टेलीमेडिसिन भी भविष्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
प्रश्न: युवा डॉक्टरों को आप क्या संदेश देना चाहेंगे?
उत्तर:डॉक्टर बनने के बाद पढ़ाई समाप्त नहीं होती बल्कि वहीं से शुरू होती है। हर दिन कुछ नया सीखना, मरीज के प्रति संवेदनशील रहना और ईमानदारी से सेवा करना ही एक अच्छे चिकित्सक की पहचान है।
प्रश्न: आजकल कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई ) चिकित्सा क्षेत्र में तेजी से बढ़ रही है। आप इसे कैसे देखते हैं?
उत्तर:आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस डॉक्टरों की सहायता कर सकती है, लेकिन डॉक्टर की जगह नहीं ले सकती। अंतिम निर्णय हमेशा अनुभवी चिकित्सक का ही रहेगा। एआई एक सहयोगी तकनीक है, विकल्प नहीं।
प्रश्न: आपने चिकित्सा के साथ-साथ समाज सेवा में भी उल्लेखनीय कार्य किए हैं। इसकी प्रेरणा कहां से मिली?
उत्तर:समाज ने हमें बहुत कुछ दिया है। इसलिए समाज को वापस देना हमारा नैतिक दायित्व है। स्वास्थ्य शिविर, गरीब मरीजों की सहायता और ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार मेरी प्राथमिकताओं में हमेशा रहा है।
प्रश्न: वर्तमान में रिम्स रांची के निदेशक के रूप में आपकी प्राथमिकताएं क्या हैं?
उत्तर:मेरी कोशिश है कि मरीजों को बेहतर और समयबद्ध उपचार मिले। चिकित्सा शिक्षा और शोध को और मजबूत बनाया जाए तथा आधुनिक तकनीकों का अधिकतम उपयोग करके संस्थान को राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट बनाया जाए।
प्रश्न: दैनिक यूथ इंडिया के माध्यम से देश के लोगों को आप क्या संदेश देना चाहेंगे?
उत्तर:स्वास्थ्य से बड़ा कोई धन नहीं है। नियमित स्वास्थ्य जांच कराएं, संतुलित भोजन करें, व्यायाम करें, तनाव से दूर रहें और किसी भी बीमारी के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करें। स्वस्थ नागरिक ही मजबूत भारत का निर्माण करेंगे।


