नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला-कमाल मौला परिसर विवाद में जुम्मे की नमाज के लिए वैकल्पिक स्थान आवंटित करने का मुद्दा एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। मुस्लिम पक्ष ने आरोप लगाया है कि अदालत के निर्देशों के बावजूद सरकार ने विवादित स्थल के निकट नमाज के लिए उपयुक्त जगह उपलब्ध नहीं कराई है।
मुस्लिम पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हुजैफा अहमदी ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि भोजशाला परिसर के आसपास खाली भूमि उपलब्ध है, लेकिन राज्य सरकार उसे जुम्मे की नमाज के लिए आवंटित नहीं कर रही। उनका कहना था कि जो वैकल्पिक स्थान दिया गया है, वह काफी दूर है और अदालत के “पास या निकट” स्थान उपलब्ध कराने के निर्देश की भावना के अनुरूप नहीं है।
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम व्यवस्था के तहत मध्य प्रदेश सरकार को निर्देश दिया था कि विवादित भोजशाला परिसर के निकट या आसपास मुस्लिम समुदाय के लिए जुम्मे की नमाज अदा करने हेतु अलग खुला स्थान उपलब्ध कराया जाए। साथ ही स्पष्ट किया था कि यह व्यवस्था अंतिम निर्णय तक अस्थायी रहेगी।
मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार इस मुद्दे पर विचार कर रही है। सुप्रीम कोर्ट इस संवेदनशील विवाद में दोनों पक्षों की दलीलें सुनते हुए आगे की सुनवाई कर रहा है।
भोजशाला विवाद पर मुस्लिम पक्ष की सुप्रीम कोर्ट से गुहार, कहा- ‘नमाज के लिए पास में जगह नहीं दी गई’


