नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र में मंगलवार को एंटी पेपर लीक बिल को लेकर जोरदार राजनीतिक टकराव देखने को मिला। लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसद विभिन्न मुद्दों को लेकर वेल में पहुंच गए और नारेबाजी शुरू कर दी। लगातार हंगामे के कारण दोनों सदनों की कार्यवाही दोपहर दो बजे तक स्थगित करनी पड़ी। अब लोकसभा में दो बजे से एंटी पेपर लीक बिल पर लगभग छह घंटे तक विस्तृत चर्चा होने की संभावना है।
सोमवार को प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने एंटी पेपर लीक बिल लोकसभा में पेश किया था, लेकिन विपक्ष की ओर से गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग किए जाने के कारण चर्चा शुरू नहीं हो सकी। इसके बाद सरकार और विपक्ष के बीच चर्चा के समय को लेकर सहमति बनी, जिसके आधार पर मंगलवार को बिल पर बहस का कार्यक्रम तय किया गया।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन में व्यवस्था बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि लोकतंत्र में हर मुद्दे पर चर्चा होनी चाहिए, लेकिन प्रश्नकाल बाधित नहीं होना चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पक्ष और विपक्ष को अपनी बात रखने का पूरा अवसर दिया जाएगा तथा चर्चा का समय आपसी सहमति से तय किया जाएगा।
संसद की कार्यवाही शुरू होने से पहले भाजपा सांसदों ने संसद परिसर में प्रदर्शन कर पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस के इस्तीफे की मांग उठाई। भाजपा का आरोप है कि पेपर लीक के मामलों में जवाबदेही तय होनी चाहिए। वहीं विपक्ष सरकार को विभिन्न मुद्दों पर घेरने की रणनीति पर कायम रहा।
इस बीच पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव माथे पर प्लास्टर और हाथ में लाठी लेकर संसद पहुंचे। उन्होंने कहा कि यह छात्रों के समर्थन तथा जंतर-मंतर सहित विभिन्न स्थानों पर प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुए बल प्रयोग के विरोध का प्रतीक है। उनकी इस प्रतीकात्मक मौजूदगी ने संसद परिसर में लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा।
उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार इस विधेयक को परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने, पेपर लीक पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने और दोषियों के खिलाफ कठोर दंड का प्रावधान करने की दिशा में बड़ा कदम बता रही है। वहीं विपक्ष इस पर विस्तृत चर्चा और कुछ प्रावधानों में संशोधन की मांग कर रहा है। ऐसे में दोपहर बाद होने वाली बहस को मानसून सत्र की सबसे महत्वपूर्ण चर्चाओं में से एक माना जा रहा है।


