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Monday, July 27, 2026

मिलावटी सरसों के तेल का खेल जारी, सावन से पहले बढ़ी चिंता; कार्रवाई की मांग तेज

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शमशाबाद/फर्रुखाबाद। सावन माह के आगमन से पहले शमशाबाद कस्बे और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में मिलावटी सरसों के तेल की बिक्री को लेकर लोगों की चिंता बढ़ गई है। समाजसेवियों और जनप्रतिनिधियों ने आरोप लगाया है कि बाजार में धड़ल्ले से मिलावटी तेल बेचा जा रहा है और संबंधित विभागों की उदासीनता आम जनता के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो यह लापरवाही किसी की जान पर भी भारी पड़ सकती है।
स्थानीय लोगों के अनुसार इन दिनों शमशाबाद नगर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित कई तेल कोल्हुओं और कारखानों में शुद्ध सरसों के तेल के नाम पर मिलावट का खेल चल रहा है। आरोप है कि सरसों के तेल में सस्ती रिफाइंड और अन्य अखाद्य तेल मिलाकर बाजार में बेचा जा रहा है। इससे एक ओर कारोबारियों को भारी मुनाफा हो रहा है, वहीं दूसरी ओर उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।
व्यापारिक सूत्रों का कहना है कि बाजार में सरसों का तेल 180 से 200 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है, जबकि 15 किलो का एक पीपा 2500 से 2600 रुपये में थोक विक्रेताओं को उपलब्ध कराया जा रहा है। उपभोक्ताओं का आरोप है कि शुद्धता की गारंटी देने के बावजूद उन्हें मिलावटी तेल ही बेचा जा रहा है।
कई खरीदारों ने बताया कि बाजार से खरीदा गया सरसों का तेल जब कड़ाही में डाला गया तो उसमें असामान्य रूप से झाग बनने लगे और तेल उफनने लगा। इसके बाद उन्हें मिलावट की आशंका हुई। लोगों का कहना है कि पहले इस प्रकार की समस्या कभी देखने को नहीं मिलती थी।
सूत्रों के मुताबिक कासगंज, आगरा और जयपुर से भी बड़ी मात्रा में सरसों का तेल जनपद में आ रहा है। कुछ लोगों ने आशंका जताई है कि इनमें से कुछ तेल में मिलावट की जा रही है। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि खाद्य तेलों में अखाद्य या निम्न गुणवत्ता वाले पदार्थों की मिलावट की जाए तो उसका सेवन स्वास्थ्य के लिए गंभीर रूप से हानिकारक हो सकता है।
समाजसेवियों, जनप्रतिनिधियों और स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन तथा स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि बाजार में बिक रहे सरसों के तेल के नमूने लेकर उनकी प्रयोगशाला जांच कराई जाए। यदि जांच में मिलावट की पुष्टि होती है तो दोषी कारोबारियों और मिलावटखोरों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि आम जनता को सुरक्षित एवं शुद्ध खाद्य सामग्री उपलब्ध कराई जा सके।

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