लखनऊ। प्रदेश में गोवंश संरक्षण और पशुपालकों को राहत देने के उद्देश्य से योगी सरकार ने गोचर भूमि पर हरित चारा आच्छादन अभियान को तेज कर दिया है। सरकार के अनुसार अब तक 39,721 हेक्टेयर गोचर भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया जा चुका है, जबकि 58,115 ग्राम पंचायतों में कुल 61,118.85 हेक्टेयर गोचर भूमि उपलब्ध है। इस अभियान का लक्ष्य गोवंश के लिए सालभर हरे चारे की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित करना है।
प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित 6,287 अस्थायी एवं स्थायी गो-आश्रय स्थलों में से 5,050 गो-आश्रय स्थलों को 10,421.45 हेक्टेयर गोचर भूमि से जोड़ा गया है। इससे निराश्रित गोवंश के लिए प्राकृतिक चारे की उपलब्धता बढ़ेगी और गोशालाओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी कम होगा।
पशुपालन विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश मेश्राम ने बताया कि हरित चारा आच्छादन में हरदोई प्रदेश में पहले स्थान पर है, जहां 462.76 हेक्टेयर क्षेत्र में हरित चारा लगाया गया है। इसके बाद फतेहपुर (176.69 हेक्टेयर), रायबरेली (163.33 हेक्टेयर), संभल (152.74 हेक्टेयर), आगरा (151.00 हेक्टेयर), अलीगढ़ (150.00 हेक्टेयर), बहराइच (133.56 हेक्टेयर), बाराबंकी (121.28 हेक्टेयर), फिरोजाबाद (115.00 हेक्टेयर) और हमीरपुर (107.00 हेक्टेयर) का स्थान है।
सरकार ने चारे की कमी वाले जिलों, विशेषकर बुंदेलखंड क्षेत्र, की पहचान कर अंतरजनपदीय स्तर पर अधिक उत्पादन वाले जिलों से चारा और भूसा उपलब्ध कराने की योजना बनाई है। साथ ही अधिसूचित वन क्षेत्रों से घास एवं अन्य चारे की व्यवस्था भी की जाएगी ताकि सूखे या विपरीत मौसम में पशुपालकों को परेशानी न हो।
पशुओं के स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने के लिए असंतुलित चारे से होने वाली नाइट्रेट और नाइट्राइट विषाक्तता से बचाव संबंधी एडवाइजरी जारी की गई है। जिन क्षेत्रों में पेयजल की कमी है, वहां तालाबों और पोखरों को नहर या नलकूप से भरने तथा जरूरत पड़ने पर वॉटर टैंकर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
योगी सरकार वीबी-जी-राम-जी योजना के तहत चारागाह और गोचर भूमि के विकास को भी गति दे रही है। इसके साथ ही पशुओं के उपचार के लिए जीवनरक्षक दवाइयों और टीकों की पर्याप्त उपलब्धता, हीट स्ट्रेस से बचाव के लिए मिनरल मिक्सचर और इलेक्ट्रोलाइट वितरण तथा संक्रामक रोगों की सतत निगरानी की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।


