नई दिल्ली। सीजेपी के आंदोलन के समाप्त होने के बाद सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे का पहला बयान सामने आया है। उन्होंने आंदोलनों की मर्यादा और अहिंसा पर जोर देते हुए कहा कि उन्होंने अपने जीवन में 22 बार भूख हड़ताल की, लेकिन कभी भी हिंसा का रास्ता नहीं अपनाया।
अन्ना हजारे ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक आंदोलन की सबसे बड़ी ताकत शांति, अनुशासन और नैतिक बल होता है। उनका कहना था कि यदि आंदोलन अहिंसक और संयमित रहे तो उसकी स्वीकार्यता समाज और सरकार, दोनों के बीच अधिक होती है।
उन्होंने कहा, “मैंने 22 बार भूख हड़ताल की, लेकिन कभी हिंसा नहीं की। आंदोलन का उद्देश्य व्यवस्था परिवर्तन होना चाहिए, न कि टकराव पैदा करना।”
अन्ना हजारे की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब सीजेपी ने सरकार के साथ हुई वार्ता के बाद अपना आंदोलन समाप्त करने का ऐलान किया है। उनके बयान को आंदोलन की दिशा और लोकतांत्रिक विरोध के तरीकों पर महत्वपूर्ण टिप्पणी के रूप में देखा जा रहा है।
अन्ना हजारे ने युवाओं से भी अपील की कि वे अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करें, लेकिन संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों के दायरे में रहकर ही आंदोलन को आगे बढ़ाएं।


