फर्रुखाबाद। जिले में स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर लापरवाही सामने आ रही है। नियमों को दरकिनार कर टेंपो, ऑटो, ई-रिक्शा और वैन में क्षमता से अधिक छात्र-छात्राओं को बैठाकर ले जाया जा रहा है। कई वाहन न तो स्कूली वाहन के रूप में पंजीकृत हैं और न ही व्यावसायिक श्रेणी में दर्ज हैं। इतना ही नहीं, कई वाहनों से नंबर प्लेट तक गायब हैं। सुरक्षा उपकरणों की कमी के बावजूद ऐसे वाहन सड़कों पर दौड़ रहे हैं, जिससे बच्चों की जान खतरे में बनी हुई है।
परिवहन विभाग की ओर से स्कूली वाहनों के संचालन के लिए सख्त नियम बनाए गए हैं। इसके तहत बच्चों को लाने-ले जाने वाले सभी वाहनों का यूपी इंटीग्रेटेड स्कूल व्हीकल मैनेजमेंट पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य है। वाहन का फिटनेस प्रमाणपत्र, बीमा, परमिट और चालक से जुड़ी पूरी जानकारी दर्ज होनी चाहिए।
नियमों के अनुसार स्कूली वाहनों पर आगे और पीछे स्पष्ट रूप से “ऑन स्कूल ड्यूटी” लिखा होना चाहिए। साथ ही क्यूआर कोड, चालक का पूरा पता, योग्यता और लाइसेंस नंबर भी अंकित होना जरूरी है। बच्चों की सुरक्षा के लिए वाहन में फर्स्ट-एड बॉक्स, स्पीड गवर्नर और अग्निशमन यंत्र जैसे उपकरण अनिवार्य किए गए हैं।
मंगलवार को मोहम्मदाबाद क्षेत्र में एक वैन दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। हादसे में कई बच्चे घायल हुए थे। इसके बाद स्कूल प्रबंधन ने वैन को अपने विद्यालय से जुड़ा होने से इनकार कर दिया था। घायल बच्चों के संबंध में भी स्कूल की ओर से जिम्मेदारी लेने से दूरी बनाई गई थी। इस घटना ने स्कूली वाहनों की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जब स्कूली बच्चों को ले जाने वाले वाहनों की स्थिति देखी गई तो शहर में बड़ी संख्या में नियम विरुद्ध वाहन चलते मिले। कई टेंपो और ई-रिक्शा में सुरक्षा के जरूरी इंतजाम नहीं थे। वाहनों पर न तो स्कूली वाहन का चिन्ह था और न ही सुरक्षा जाली लगी हुई थी।
स्थिति यह रही कि पांच सीट की क्षमता वाले टेंपो में 10-10 बच्चों को बैठाकर ले जाया जा रहा था। कई ई-रिक्शा में चालक की सीट पर भी बच्चों को बैठाया गया था। इससे कभी भी गंभीर हादसा होने का खतरा बना हुआ है। अभिभावकों का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा के लिए बनाए गए नियमों का पालन कराया जाना चाहिए। बिना फिटनेस और सुरक्षा मानकों के चल रहे वाहनों पर तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं, परिवहन विभाग की निष्क्रियता पर भी सवाल उठ रहे हैं।
मानकों की अनदेखी कर बच्चों को ढो रहे वाहन, सुरक्षा से खिलवाड़; जिम्मेदारों की चुप्पी से बढ़ा खतरा


