– डीजीपी समेत वरिष्ठ अधिकारियों को भेजा प्रार्थना पत्र।
– सीसीटीवी व अन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच कराने की मांग।
अनुराग तिवारी
बकेवर (इटावा)। थाना बकेवर क्षेत्र में दर्ज मुकदमे को लेकर नया मोड़ सामने आया है। मुकदमे में नामजद तीन युवकों के परिजनों ने पुलिस महानिदेशक, वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों एवं अन्य सक्षम अधिकारियों को प्रार्थना पत्र भेजकर दावा किया है कि दीपेश अवस्थी, ओम अवस्थी और हर्ष अवस्थी को व्यक्तिगत रंजिश के चलते झूठे मुकदमे में फंसाया गया है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि घटना 7 जुलाई 2026 की बताई गई है, जबकि मुकदमा 18 जुलाई 2026 को दर्ज किया गया। उनका सवाल है कि यदि घटना इतनी गंभीर थी तो एफआईआर दर्ज कराने में 11 दिन की देरी क्यों हुई, और इस देरी के कारणों की निष्पक्ष जांच भी की जानी चाहिए।
प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया गया है कि घटना के समय नामजद तीनों युवक घटनास्थल पर नहीं थे, बल्कि अपने घर पर मौजूद थे। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज और अन्य स्वतंत्र साक्ष्य इस तथ्य की पुष्टि कर सकते हैं। उनका कहना है कि यदि विवेचना निष्पक्ष और वैज्ञानिक तरीके से की जाए तो निर्दोष लोगों के विरुद्ध की गई नामजदगी स्वतः स्पष्ट हो जाएगी।
शिकायतकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि मामले की प्रारंभिक पुलिस कार्रवाई और विवेचना की दिशा पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो रहे हैं। उन्होंने कहा है कि यदि उपलब्ध इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों, प्रत्यक्षदर्शियों और अन्य तथ्यों की निष्पक्ष जांच की जाती तो निर्दोष युवकों के नाम मुकदमे में शामिल नहीं होते। प्रार्थना पत्र में वर्तमान थाना प्रभारी विपिन मलिक की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई है।
परिजनों का कहना है कि तीनों युवक जिसमें 2 छात्र हैं और उनके विरुद्ध दर्ज मुकदमे का उनके भविष्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों से मांग की है कि सीसीटीवी फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान तथा अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष जांच कराई जाए, निर्दोष लोगों के नाम मुकदमे से हटाए जाएं और यदि किसी ने जानबूझकर झूठे तथ्यों के आधार पर नाम शामिल कराए हैं तो उसके विरुद्ध भी विधिक कार्रवाई की जाए।


