वॉशिंगटन। अमेरिकी प्रशासन ने वैश्विक फार्मास्युटिकल बाजार को प्रभावित करने वाला एक बड़ा आर्थिक और रणनीतिक कदम उठाते हुए विदेशी जेनेरिक दवाओं के आयात पर नया टैरिफ ढांचा घोषित किया है। इस फैसले का उद्देश्य अमेरिका में दवाओं के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना तथा भारत और चीन जैसे देशों से आयात होने वाली सस्ती जेनेरिक दवाओं पर निर्भरता कम करना बताया जा रहा है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा करते हुए कहा कि 1 अगस्त से अगले दो वर्षों तक अमेरिका में आयात होने वाली जेनेरिक दवाओं पर 0 प्रतिशत टैरिफ लागू रहेगा। इसके बाद एक वर्ष के लिए टैरिफ 100 प्रतिशत कर दिया जाएगा और फिर इसे बढ़ाकर 200 प्रतिशत तक किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह नीति निर्धारित योजना के अनुसार लागू होती है, तो इसका सबसे अधिक प्रभाव भारत और चीन जैसे उन देशों पर पड़ सकता है, जो दुनिया भर में कम लागत वाली जेनेरिक दवाओं के प्रमुख निर्यातक हैं। भारत की दवा कंपनियां अमेरिकी बाजार में बड़ी हिस्सेदारी रखती हैं, ऐसे में बढ़े हुए टैरिफ से निर्यात, लागत और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर असर पड़ने की संभावना है।
अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि इस कदम से देश में फार्मास्युटिकल विनिर्माण को बढ़ावा मिलेगा, रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और आवश्यक दवाओं के मामले में अमेरिका आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा। वहीं, वैश्विक दवा उद्योग इस घोषणा के संभावित आर्थिक प्रभावों पर नजर बनाए हुए है।


