देहरादून/बदरीनाथ। उत्तराखंड के प्रसिद्ध बदरीनाथ धाम में दान-चढ़ावा हेराफेरी के कथित मामले में जांच के दौरान बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में पता चला है कि मंदिर परिसर की 32 दिनों की सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध नहीं है, जबकि पहले संबंधित अधिकारियों की ओर से दावा किया गया था कि 45 दिनों की रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखी गई है।
मामले के सामने आने के बाद जांच एजेंसियों ने यह जानने की प्रक्रिया शुरू कर दी है कि आखिर 32 दिनों की सीसीटीवी फुटेज कैसे और किन परिस्थितियों में डिलीट हुई। यह भी जांच का विषय है कि फुटेज तकनीकी कारणों से नष्ट हुई या फिर उसे जानबूझकर हटाया गया।
सूत्रों के अनुसार, विशेषज्ञ इंजीनियर डिलीट हुई रिकॉर्डिंग को रिकवर करने का प्रयास कर रहे हैं। यदि फुटेज सफलतापूर्वक रिकवर हो जाती है तो जांच को महत्वपूर्ण साक्ष्य मिल सकते हैं और दान-चढ़ावे के लेनदेन से जुड़े कई सवालों के जवाब सामने आ सकते हैं।
इस घटनाक्रम के बाद बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) के उस दावे पर भी सवाल खड़े हो गए हैं, जिसमें कहा गया था कि मंदिर परिसर की 45 दिनों की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग सुरक्षित है। अब 32 दिनों की फुटेज गायब मिलने से सुरक्षा व्यवस्था और रिकॉर्ड संरक्षण की प्रक्रिया पर गंभीर प्रश्न उठ रहे हैं।
जांच एजेंसियां तकनीकी और प्रशासनिक दोनों पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं। फुटेज गायब होने के कारणों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। यदि किसी स्तर पर लापरवाही या जानबूझकर साक्ष्य मिटाने की पुष्टि होती है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।


