वाराणसी। देश के सबसे प्रतिष्ठित धार्मिक स्थलों में शामिल श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास का पुनर्गठन पिछले 18 महीनों से शासन स्तर पर लंबित है। अध्यक्ष और मनोनीत सदस्यों की नियुक्ति नहीं होने से न्यास का संचालन केवल पदेन अध्यक्ष और पदेन सदस्यों के भरोसे किया जा रहा है, जिससे मंदिर की लोकतांत्रिक व्यवस्था और निर्णय प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं।
जानकारी के अनुसार, मंदिर प्रशासन की ओर से पहले अध्यक्ष और सदस्यों की एक सूची शासन को भेजी गई थी, लेकिन उस पर सहमति नहीं बन सकी। इसके बाद लगभग पांच महीने पहले दूसरी सूची भी भेजी गई, जो अब तक शासन स्तर पर विचाराधीन है। लगातार हो रही देरी के कारण न्यास का पुनर्गठन अधर में लटका हुआ है।
फिलहाल मंदिर के दैनिक कार्य और आवश्यक प्रशासनिक फैसले पदेन सदस्यों द्वारा किए जा रहे हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि मनोनीत अध्यक्ष और सदस्यों की अनुपस्थिति में बड़े और महत्वपूर्ण निर्णयों में व्यापक सहभागिता तथा पारदर्शिता प्रभावित हो रही है।
धार्मिक और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस महत्वपूर्ण संस्थान में नियुक्तियों को लेकर इतनी लंबी देरी उचित नहीं है। उन्होंने शासन से जल्द से जल्द पुनर्गठन की प्रक्रिया पूरी कर मंदिर न्यास को पूर्ण स्वरूप देने की मांग की है।


