सांसद और विधायक की फटकार भी बेअसर, ठेकेदार-जेई की खींचतान से अटका निर्माण, ग्रामीणों में भारी आक्रोश
फर्रुखाबाद। ग्रामीणों को बेहतर सड़क सुविधा देने के नाम पर स्वीकृत 1.25 करोड़ रुपये की बहोरना –अहमदपुर देवरिया संपर्क मार्ग परियोजना आज सरकारी लापरवाही, विभागीय खींचतान और कार्यदायी संस्था की उदासीनता का जीता-जागता उदाहरण बन गई है। पहली ही बारिश में अधूरी सड़क दलदल में तब्दील हो गई है और ग्रामीणों का आवागमन बेहद मुश्किल हो गया है।ग्रामीणों का कहना है कि यह सड़क विधायक नागेंद्र सिंह राठौर के अथक प्रयासों से स्वीकृत हुई थी, जिससे क्षेत्र के हजारों लोगों को राहत मिलने की उम्मीद जगी थी। लेकिन अधिकारियों और ठेकेदार की कार्यशैली ने इस महत्वपूर्ण परियोजना को अधर में लटका दिया। आज हालत यह है कि सड़क पर कीचड़, जलभराव और फिसलन के कारण स्कूल जाने वाले बच्चे, किसान, महिलाएं और राहगीर रोजाना परेशान हो रहे हैं।
ग्रामीणों के अनुसार सांसद मुकेश राजपूत और विधायक नागेंद्र सिंह राठौर ने राजस्व कर्मियों और ठेकेदार को कड़ी फटकार लगा चुके हैं तथा निर्माण कार्य जल्द पूरा कराने के निर्देश भी दे चुके हैं। इसके बावजूद निर्माण कार्य ने रफ्तार नहीं पकड़ी, जिससे लोगों में विभाग के प्रति भारी नाराजगी है। इस मार्ग के लिए रास्ते में कुछ लोग वाधा बने हैं जिनके ऊपर मुकदमा पंजीकृत कराया गया है इसके बावजूद कार्य शुरू नहीं हो सका।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि ठेकेदार और जूनियर इंजीनियर (जेई) के बीच आपसी तालमेल की कमी और खींचतान के कारण सड़क निर्माण लगातार लटका हुआ है। इस आपसी विवाद की कीमत अब क्षेत्र की जनता चुका रही है। करोड़ों रुपये की परियोजना अधूरी पड़ी है और ग्रामीण दलदल से होकर गुजरने को मजबूर हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब जनप्रतिनिधियों के हस्तक्षेप और निर्देशों के बाद भी अधिकारी और ठेकेदार जिम्मेदारी नहीं निभा पा रहे हैं, तो आखिर जवाबदेही किसकी तय होगी? यदि समय रहते निर्माण कार्य पूरा किया गया होता तो आज करोड़ों रुपये की परियोजना बदहाली का प्रतीक न बनती।ग्रामीणों ने मांग की है कि निर्माण कार्य तत्काल शुरू कराया जाए, पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और लापरवाही तथा परियोजना में बाधा डालने वाले जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि जनता के पैसे और जनप्रतिनिधियों के प्रयासों का सम्मान बचाया जा सके।


