– सड़कों पर तैरता विकास
– लाइन पड़ने के काम मे सुस्ती
– जिम्मेदार मौन, पहली बार कालोनी के हाल गांव से भी बेहाल
फर्रुखाबाद। पहली ही तेज बारिश ने आवास विकास कॉलोनी में विकास कार्यों की हकीकत उजागर कर दी। बरसाती पानी घरों में घुसने से लोगों का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। कॉलोनी की गलियां तालाब में तब्दील हो गईं, जबकि पाश क्षेत्र मानी जाने वाली इस कॉलोनी में करोड़ों रुपये के विकास कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि सीवर और पाइपलाइन डालने के नाम पर पूरी कॉलोनी की गलियां खोद दी गईं, लेकिन कार्य पूरा होने के बाद सड़कें और जल निकासी व्यवस्था दुरुस्त नहीं की गई। नतीजा यह हुआ कि थोड़ी सी बारिश में ही पानी घरों में घुस गया और लोगों का बाहर निकलना तक मुश्किल हो गया।
सबसे अधिक परेशानी बुजुर्गों, महिलाओं और स्कूली बच्चों को उठानी पड़ रही है। कई बुजुर्ग घरों में ही कैद होकर रह गए हैं, क्योंकि गड्ढों और जलभराव के बीच निकलना जोखिम भरा हो गया है। दोपहिया वाहन फिसल रहे हैं और पैदल चलना भी किसी चुनौती से कम नहीं है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जिन सड़कों को विकास के नाम पर खोदा गया था, उन्हें समय पर ठीक नहीं कराया गया। बरसात शुरू होने से पहले जल निकासी की व्यवस्था भी नहीं की गई। परिणामस्वरूप पूरी कॉलोनी में जगह-जगह जलभराव है और लोगों का सामान्य जीवन प्रभावित हो गया है।
निवासियों का आरोप है कि कई बार संबंधित विभाग और जिम्मेदार अधिकारियों से शिकायत की गई, लेकिन समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। जनता पूछ रही है कि विकास कार्यों पर खर्च हुए करोड़ों रुपये का लाभ आखिर किसे मिला, जब पहली ही बारिश में पूरी व्यवस्था ध्वस्त हो गई।
अब कॉलोनीवासी प्रशासन से तत्काल जल निकासी, क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत और अधूरे विकास कार्यों की उच्चस्तरीय जांच की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो जन आंदोलन शुरू किया जाएगा।
सवाल यह है कि आखिर जनता कब तक विकास के दावों और बदहाल सड़कों के बीच पिसती रहेगी? पहली बारिश ने यह साबित कर दिया है कि कागजों पर हुआ विकास जमीनी हकीकत की पहली परीक्षा में ही फेल हो गया।


