– राजेपुर सीएचसी का किया निरीक्षण
– एनडीआरएफ ने मॉक ड्रिल से सिखाए बचाव के गुर
– विद्यार्थियों को आपदा प्रबंधन का दिया प्रशिक्षण
– अधिकारियों को राहत-बचाव व्यवस्था दुरुस्त रखने के निर्देश
अमृतपुर (फर्रुखाबाद)। जनपद में संभावित बाढ़ की आशंका को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। इसी क्रम में जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर ने मंगलवार को राजेपुर क्षेत्र का दौरा कर बाढ़ से निपटने के लिए की गई तैयारियों का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने राजेपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) का निरीक्षण कर स्वास्थ्य सेवाओं की तैयारियों का जायजा लिया तथा बाद में गंगापार स्थित महात्मा गांधी इंटर कॉलेज में आयोजित बाढ़ सुरक्षा एवं आपदा प्रबंधन जागरूकता कार्यक्रम में शामिल होकर विद्यार्थियों को जागरूक किया।
सबसे पहले जिलाधिकारी ने राजेपुर सीएचसी पहुंचकर अस्पताल में उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं, दवाओं के स्टॉक, ऑक्सीजन, एंबुलेंस सेवा, चिकित्सकीय उपकरणों, आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था तथा बाढ़ की स्थिति में मरीजों के उपचार की तैयारियों का गहन निरीक्षण किया। उन्होंने अस्पताल की साफ-सफाई, वार्डों की व्यवस्था, चिकित्सकों की उपस्थिति और आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता का भी बारीकी से परीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि बरसात और बाढ़ के मौसम में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी आवश्यक दवाएं, जीवनरक्षक उपकरण, एंबुलेंस तथा चिकित्सा टीमों को हर समय तैयार रखा जाए, ताकि आपात स्थिति में प्रभावित लोगों को तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जा सके।
इसके बाद जिलाधिकारी महात्मा गांधी इंटर कॉलेज पहुंचे, जहां बाढ़ सुरक्षा एवं आपदा प्रबंधन विषय पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। उन्होंने छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि प्राकृतिक आपदाओं से घबराने के बजाय सतर्कता, जागरूकता और समय पर सही निर्णय ही सबसे बड़ा बचाव है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने परिवार और आसपास के लोगों को भी बाढ़ से बचाव के उपायों के प्रति जागरूक करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की टीम ने मॉक ड्रिल के माध्यम से बाढ़ के समय राहत एवं बचाव कार्यों का व्यावहारिक प्रदर्शन किया। टीम ने बताया कि यदि बाढ़ का पानी घर में प्रवेश करने लगे तो सबसे पहले मुख्य विद्युत आपूर्ति बंद कर दें, ताकि करंट लगने जैसी दुर्घटनाओं से बचा जा सके। साथ ही बच्चों को जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रखें, अनावश्यक रूप से बाढ़ के पानी में प्रवेश न करें और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।
एनडीआरएफ के जवानों ने गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों, दिव्यांगजनों तथा छोटे बच्चों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने की रेस्क्यू प्रक्रिया का भी प्रदर्शन किया। आपातकालीन परिस्थितियों में राहत एवं बचाव अभियान किस प्रकार संचालित किया जाता है, इसका जीवंत प्रदर्शन देखकर छात्र-छात्राओं ने आपदा प्रबंधन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं।
जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर ने कहा कि संभावित बाढ़ से निपटने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह तैयार है। सभी संबंधित विभागों को अलर्ट मोड पर रखा गया है और संवेदनशील क्षेत्रों की लगातार निगरानी की जा रही है। उन्होंने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने तथा किसी भी आपात स्थिति में तत्काल प्रशासन अथवा हेल्पलाइन से संपर्क करने की अपील की।
इस अवसर पर राजेपुर थानाध्यक्ष नागेंद्र सिंह, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी, एनडीआरएफ के जवान, विद्यालय प्रशासन, शिक्षक-शिक्षिकाएं एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।


