नई दिल्ली। आठवें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों की उम्मीदें एक बार फिर बढ़ गई हैं। कर्मचारी संगठनों ने केंद्र सरकार के समक्ष वेतन संरचना में व्यापक बदलाव की मांग रखते हुए न्यूनतम वेतन में करीब 70 प्रतिशत तक वृद्धि, महंगाई भत्ता (डीए) को मूल वेतन में शामिल करने तथा मकान किराया भत्ता (एचआरए) और परिवहन भत्ता (टीए) में बढ़ोतरी की मांग उठाई है।
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में महंगाई, आवास, शिक्षा और स्वास्थ्य पर होने वाला खर्च तेजी से बढ़ा है। ऐसे में वर्तमान वेतन संरचना में संशोधन समय की आवश्यकता बन गया है। उनका मानना है कि यदि सरकार इन मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेती है तो लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को सीधा लाभ मिलेगा।
प्रस्तावित मांगों के अनुसार, लेवल-1 के कर्मचारियों का मासिक वेतन और भत्ते मिलाकर लगभग ₹63,500 तक पहुंच सकता है। हालांकि यह कर्मचारी संगठनों का प्रस्ताव है और इस पर अंतिम निर्णय अभी केंद्र सरकार द्वारा लिया जाना बाकी है।
कर्मचारी संगठनों की सबसे प्रमुख मांग महंगाई भत्ते (डीए) को मूल वेतन में मर्ज करने की है। उनका तर्क है कि इससे भविष्य में एचआरए, टीए, पेंशन और अन्य भत्तों की गणना नए मूल वेतन के आधार पर होगी, जिससे कर्मचारियों को दीर्घकालिक आर्थिक लाभ मिलेगा।
इसके अलावा एचआरए और परिवहन भत्ते में भी संशोधन की मांग की गई है, ताकि कर्मचारियों को बढ़ती जीवन-यापन लागत से राहत मिल सके। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि नया वेतन ढांचा वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप होना चाहिए।
फिलहाल आठवां वेतन आयोग विभिन्न कर्मचारी संगठनों और संबंधित पक्षों से सुझाव प्राप्त कर रहा है। आयोग इन सुझावों का अध्ययन कर अपनी सिफारिशें केंद्र सरकार को सौंपेगा। इसके बाद सरकार अंतिम निर्णय लेकर नए वेतनमान और भत्तों की घोषणा करेगी।
देशभर के लाखों केंद्रीय कर्मचारी और पेंशनभोगी अब आठवें वेतन आयोग की सिफारिशों और केंद्र सरकार के फैसले का इंतजार कर रहे हैं। यदि प्रमुख मांगें स्वीकार होती हैं, तो यह पिछले कई वर्षों की सबसे बड़ी वेतन वृद्धि साबित हो सकती है।


