लखनऊ। उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक आयोग में अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्तियों में हो रही देरी पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने कड़ी नाराजगी जताई है। न्यायालय ने मामले को गंभीर मानते हुए अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव (ACS) को 20 जुलाई को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया है।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने आयोग में लंबे समय से नियुक्तियां लंबित रहने पर सरकार से जवाब तलब किया। न्यायालय ने पूछा कि आयोग के गठन और सदस्यों की नियुक्ति में आखिर इतनी देरी क्यों हो रही है और इस संबंध में अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि आयोग जैसे संवैधानिक और वैधानिक महत्व के संस्थानों का लंबे समय तक रिक्त रहना उचित नहीं है। अदालत ने राज्य सरकार से नियुक्तियों में हो रही देरी के कारणों का विस्तृत ब्यौरा प्रस्तुत करने को कहा है।
मामले की अगली सुनवाई 20 जुलाई को होगी, जिस दिन अपर मुख्य सचिव अल्पसंख्यक कल्याण को न्यायालय के समक्ष उपस्थित होकर स्थिति स्पष्ट करनी होगी। हाईकोर्ट की इस सख्त टिप्पणी के बाद सरकार पर आयोग में लंबित नियुक्तियों को लेकर जवाबदेही बढ़ गई है।


