लखनऊ। प्रदेश में बच्चों की नियमित स्कूल उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग ने सख्त व्यवस्था लागू की है। अब यदि कोई छात्र लगातार दो दिन तक विद्यालय नहीं पहुंचता है तो संबंधित कक्षा शिक्षक उसके अभिभावकों से सीधे फोन पर संपर्क कर अनुपस्थिति का कारण जानेंगे और बच्चे को नियमित रूप से स्कूल भेजने के लिए प्रेरित करेंगे। यह व्यवस्था ‘स्कूल चलो अभियान’ के तहत लागू की गई है।
बेसिक शिक्षा विभाग ने 15 जुलाई तक विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने सभी जिलों के अधिकारियों और शिक्षकों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित नहीं रहना चाहिए। विद्यालयों के नामांकन रजिस्टर में दर्ज अभिभावकों के मोबाइल नंबरों के माध्यम से शिक्षकों को सीधे संपर्क करने की जिम्मेदारी दी गई है।
विभाग ने केवल उपस्थिति बढ़ाने ही नहीं, बल्कि ड्रॉपआउट रोकने और नए नामांकन बढ़ाने पर भी विशेष जोर दिया है। कक्षा पांच के शिक्षकों को विद्यार्थियों का कक्षा छह में, कक्षा आठ के शिक्षकों को कक्षा नौ में तथा कक्षा नौ के शिक्षकों को कक्षा 10 में प्रवेश सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
इसके साथ ही तीन से छह वर्ष तक के बच्चों का बाल वाटिका में अधिक से अधिक नामांकन कराने के लिए शिक्षकों को आशा कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय कर सर्वे करने के निर्देश दिए गए हैं। स्कूल प्रबंधन समितियों (एसएमसी) के माध्यम से अभिभावकों की भागीदारी बढ़ाकर बच्चों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने की भी योजना बनाई गई है।
शिक्षा विभाग का मानना है कि समय पर अभिभावकों से संपर्क और सतत निगरानी से विद्यालय छोड़ने वाले बच्चों की संख्या में कमी आएगी तथा प्रदेश में शत-प्रतिशत नामांकन और नियमित उपस्थिति का लक्ष्य हासिल करने में मदद मिलेगी।


