*मस्तिष्क, हृदय, फेफड़े समेत कई आंतरिक अंग गायब
* परिवार ने सीबीआई जांच की मांग उठाई
देवरिया। जिले के रहने वाले मर्चेंट नेवी के भारतीय नाविक राकेश चौहान की संदिग्ध मौत ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वेनेजुएला से भारत पहुंचे उनके शव के दोबारा पोस्टमार्टम में मस्तिष्क, हृदय, दोनों फेफड़े, लीवर, दोनों गुर्दे, प्लीहा, अग्न्याशय, पेट और आंतों समेत कई महत्वपूर्ण आंतरिक अंग गायब मिलने से पूरे मामले ने सनसनी फैला दी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया है कि आंतरिक अंगों के अभाव में मौत का वास्तविक कारण निर्धारित नहीं किया जा सकता।
देवरिया के लंगड़ा बाजार टोला निवासी 33 वर्षीय राकेश चौहान नवंबर 2025 में एक निजी शिपिंग कंपनी के माध्यम से मर्चेंट नेवी के जहाज पर चालक दल के सदस्य के रूप में वेनेजुएला गए थे। परिजनों के अनुसार मई 2026 में कंपनी ने पहले जहाज पर गिरकर घायल होने और अगले ही दिन उनकी मौत की सूचना दी। कंपनी ने एक सप्ताह में शव भारत भेजने का आश्वासन दिया था, लेकिन करीब एक महीने बाद 4 जून को पार्थिव शरीर देवरिया पहुंचा।
शव के भारत पहुंचने पर जिलाधिकारी के आदेश से दोबारा पोस्टमार्टम कराया गया, जिसमें चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। रिपोर्ट के अनुसार शव पर गर्दन से जघनास्थि तक लंबा चीरा और सिर के पीछे कान से कान तक टांके लगे मिले, जबकि शरीर के कई प्रमुख आंतरिक अंग पूरी तरह अनुपस्थित थे। इससे आशंका और गहरा गई कि विदेश में शव के साथ क्या हुआ और किन परिस्थितियों में अंग गायब हुए।
मृतक के पिता रामदेव चौहान ने आरोप लगाया कि परिवार को न तो विदेश में हुए पोस्टमार्टम की रिपोर्ट दी गई और न ही मौत से जुड़े कोई आधिकारिक दस्तावेज उपलब्ध कराए गए। उन्होंने केंद्र सरकार से निष्पक्ष जांच, संबंधित कंपनी की भूमिका की पड़ताल और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
वहीं फेडरेशन ऑफ सीफेरर्स यूनियंस ऑफ इंडिया (FSUI) ने भी इस मामले को अत्यंत गंभीर बताते हुए भारतीय दूतावास के तत्काल हस्तक्षेप, वेनेजुएला के अधिकारियों की जवाबदेही तय करने, पूरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट सार्वजनिक करने और मृतक के परिवार को न्याय एवं उचित मुआवजा दिलाने की मांग की है।
भारतीय नाविक के शव से कई महत्वपूर्ण अंग गायब मिलने की यह घटना अब अंतरराष्ट्रीय स्तर का संवेदनशील मामला बन गई है। परिवार का कहना है कि जब तक मौत की वास्तविक वजह सामने नहीं आती और दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक उन्हें न्याय नहीं मिलेगा।


