कई जिलों में कोचिंग सेंटर सील, नोटिस जारी, फायर सेफ्टी नियमों की हो रही सख्त जांच
लखनऊ। लखनऊ के अलीगंज अग्निकांड के बाद मुख्यमंत्री के निर्देश पर उत्तर प्रदेश में फायर सेफ्टी और भवन सुरक्षा मानकों को लेकर व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत बिना मानकों के संचालित कोचिंग संस्थानों, लाइब्रेरी और अन्य शैक्षणिक प्रतिष्ठानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। कई जिलों में कोचिंग सेंटर सील किए गए हैं, जबकि कई संस्थानों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।
बिजनौर के नगीना में जांच के दौरान एक लाइब्रेरी संचालक से अधिकारियों ने पूछा कि आग लगने की स्थिति में छात्रों को कैसे बचाया जाएगा। इस पर संचालक ने कथित रूप से जवाब दिया कि “खिड़की से कूद जाएंगे।” इस जवाब को गंभीर लापरवाही मानते हुए प्रशासन ने लाइब्रेरी को तत्काल सील कर दिया।
अलीगढ़ में फायर सेफ्टी और भवन मानकों का उल्लंघन मिलने पर 15 कोचिंग संस्थानों को सील कर दिया गया। वहीं जांच टीम के पहुंचने की सूचना मिलते ही 11 कोचिंग संचालक ताला लगाकर मौके से फरार हो गए।
मेरठ में 10 कोचिंग संस्थानों को बंद कराया गया, जबकि बागपत में सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए 32 कोचिंग संस्थानों को सील किया गया। मुजफ्फरनगर में 10 कोचिंग सेंटर, देवरिया में 3, काशी (वाराणसी) में 35 और मुरादाबाद में 13 कोचिंग संस्थानों को सील किया गया है।
इसके अलावा प्रयागराज में 10 कोचिंग संस्थानों को नोटिस जारी कर निर्धारित समय के भीतर सुरक्षा मानकों और आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रदेश सरकार का कहना है कि छात्रों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। जिन संस्थानों में फायर एनओसी, भवन मानचित्र, आपातकालीन निकास, अग्निशमन उपकरण और अन्य सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जाएगा, उनके खिलाफ सीलिंग, लाइसेंस निरस्तीकरण और अन्य कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह अभियान आगे भी पूरे प्रदेश में लगातार जारी रहेगा।


