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Wednesday, June 24, 2026

आदिवासी सम्मेलन में अखिलेश यादव का हमला, लोहिया आवास से लेकर राम मंदिर और अलीगंज अग्निकांड तक सरकार को घेरा

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लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने आदिवासी समाज के एक कार्यक्रम में प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कई बड़े वादे और राजनीतिक आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी की सरकार बनने पर आदिवासियों को लोहिया आवास योजना का लाभ दिया जाएगा तथा उत्तर प्रदेश में अलग से अनुसूचित जनजाति आयोग का गठन किया जाएगा।
अखिलेश यादव ने कहा कि अखिल भारतीय गोंड महासभा के लिए लखनऊ में एक पीडीए भवन बनाया जाएगा, जिसमें हॉस्टल की भी सुविधा होगी। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज के उत्थान और शिक्षा के लिए विशेष योजनाएं चलाई जाएंगी।
आदिवासियों के जल, जंगल और जमीन के मुद्दे को उठाते हुए सपा प्रमुख ने कहा कि आदिवासी समुदाय का प्रकृति और भूमि से भावनात्मक जुड़ाव रहा है, लेकिन वर्तमान सरकार अपने स्वार्थों के लिए लाखों एकड़ जमीन को अन्य लोगों के हाथों में सौंप रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि आदिवासियों के अधिकारों की अनदेखी की जा रही है।
लखनऊ के अलीगंज अग्निकांड का जिक्र करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि यह कोई सामान्य हादसा नहीं था। उन्होंने दावा किया कि यदि समय रहते उचित कदम उठाए जाते और दीवार काटने जैसे निर्णय तत्काल लिए जाते, तो कई बच्चों की जान बचाई जा सकती थी। उन्होंने कहा कि अपने बच्चे को खोने का दर्द सबसे बड़ा दुख होता है और इसे केवल पीड़ित परिवार ही समझ सकते हैं।
राम मंदिर से जुड़े कथित चढ़ावा और भ्रष्टाचार के आरोपों पर भी उन्होंने सरकार को घेरा। अखिलेश यादव ने कहा कि प्रभु श्रीराम के नाम पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप सामने आ रहे हैं और सीसीटीवी फुटेज गायब होने जैसी बातें भी सामने आ रही हैं। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।
सपा अध्यक्ष ने आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार ने एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता और रखरखाव को नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि जिस परियोजना को प्रदेश की पहचान बनाया गया था, उसे उपेक्षा का शिकार बनाया जा रहा है।
अपने संबोधन में अखिलेश यादव ने सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जो लोग केवल अपने व्यक्तिगत हितों के लिए राजनीति करते हैं, उनसे जनता की समस्याओं के समाधान की उम्मीद नहीं की जा सकती।
कार्यक्रम के दौरान उनके बयान राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बने रहे। आगामी चुनावों को देखते हुए आदिवासी समाज को लेकर की गई घोषणाओं और सरकार पर लगाए गए आरोपों को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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