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Wednesday, June 24, 2026

आवास विकास परिषद में ठेकों मे फर्जी दस्तावेजों के सहारे करोड़ों के कार्य आवंटन

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद में ठेकों के आवंटन को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि कुछ निर्माण कंपनियों और विभागीय अधिकारियों की कथित मिलीभगत से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर करोड़ों रुपये के ठेके हासिल किए गए हैं। मामले को लेकर शासन स्तर तक शिकायतें किए जाने के बावजूद कार्रवाई न होने के आरोप लगाए जा रहे हैं।

शिकायतों के अनुसार शक्ति कंस्ट्रक्शन से जुड़े यमुना प्रसाद और उमेश पर फर्जी बैंक सॉल्वेंसी तथा अन्य दस्तावेजों का इस्तेमाल कर विभिन्न परियोजनाओं के ठेके प्राप्त करने के आरोप लगाए गए हैं। आरोप है कि सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी ) से संबंधित कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं में इसी कंपनी को बड़े पैमाने पर कार्य आवंटित किए गए।

बताया जा रहा है कि बहराइच, भिनगा, लखनऊ के वृंदावन सेक्टर-20 बी तथा अनौरा क्षेत्र की एसटीपी परियोजनाओं में लगाए गए दस्तावेजों की वैधता को लेकर सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि टेंडर प्रक्रिया में प्रस्तुत कुछ प्रमाणपत्रों और वित्तीय दस्तावेजों की स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए।

मामले में यह भी आरोप लगाया गया है कि संयुक्त उद्यम के नाम पर राजस्थान से संबंधित कथित अनुभव प्रमाणपत्र और अन्य दस्तावेज लगाए गए, जबकि संबंधित कंपनियों के कार्य अनुभव को लेकर विवाद की स्थिति है। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि कुछ दस्तावेज वास्तविक तथ्यों से मेल नहीं खाते और उनकी सत्यता की जांच आवश्यक है।
शिकायतों में यह भी कहा गया है कि आवास आयुक्त तथा मुख्यमंत्री कार्यालय तक मामले की जानकारी पहुंचाई गई, लेकिन अब तक किसी निर्णायक कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है। वहीं कुछ अधिकारियों पर भी विशेष कंपनियों के प्रति नरम रुख अपनाने के आरोप लगाए गए हैं।
हालांकि इन आरोपों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। न तो संबंधित विभाग की ओर से कोई विस्तृत जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की गई है और न ही आरोपित पक्षों की ओर से इन आरोपों पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने आई है।
यदि शिकायतों में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो मामला केवल वित्तीय अनियमितता तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सरकारी टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करेगा। ऐसे में निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग तेज हो सकती है, ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई हो।

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