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Tuesday, June 23, 2026

ऐसा लग रहा जैसे प्रदेश में सरकार नाम की कोई चीज ही नहीं : अखिलेश यादव

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अग्निकांड पीड़ितों से मिले सपा प्रमुख, फायर एनओसी और नक्शों की जांच की मांग

मृतकों और गंभीर घायलों के परिजनों को एक-एक करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग

लखनऊ। राजधानी के अलीगंज अग्निकांड को लेकर प्रदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मंगलवार को केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर पहुंचकर हादसे में घायल लोगों का हालचाल जाना और इसके बाद सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार की लापरवाही इस घटना में सामने आई है, उससे ऐसा प्रतीत होता है कि प्रदेश में सरकार नाम की कोई व्यवस्था ही नहीं बची है।

घायलों और उनके परिजनों से मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि अग्निकांड में 15 लोगों की मौत अत्यंत दुखद और पीड़ादायक है। उन्होंने आरोप लगाया कि सुरक्षा मानकों की खुलेआम अनदेखी की गई, जिसके कारण यह भयावह हादसा हुआ। उनका कहना था कि यदि समय रहते नियमों का पालन कराया गया होता तो कई लोगों की जान बचाई जा सकती थी।

सपा प्रमुख ने सरकार पर बड़े अधिकारियों को बचाने का आरोप लगाते हुए कहा कि कार्रवाई केवल निचले स्तर के कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर ऐसे भवनों को फायर एनओसी किस आधार पर जारी की गई और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ अब तक कठोर कार्रवाई क्यों नहीं हुई। उन्होंने मांग की कि फायर एनओसी जारी करने की प्रक्रिया, भवन के स्वीकृत नक्शों और संबंधित विभागों की भूमिका की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।

अखिलेश यादव ने कहा कि प्रदेश में छापेमारी और जांच की कार्रवाई अब केवल औपचारिकता बनकर रह गई है। भ्रष्टाचार की जड़ें इतनी गहरी हो चुकी हैं कि नियमों की अनदेखी कर लोगों की जिंदगी तक दांव पर लगाई जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी तंत्र की लापरवाही और जवाबदेही की कमी के कारण आम जनता को अपनी जान गंवानी पड़ रही है।

सपा अध्यक्ष ने मृतकों और गंभीर रूप से घायल पीड़ितों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता देने की मांग करते हुए कहा कि इस त्रासदी से प्रभावित परिवारों को केवल सांत्वना नहीं, बल्कि ठोस आर्थिक मदद की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि संकट की इस घड़ी में पीड़ित परिवारों के साथ खड़ा होना सरकार की नैतिक और संवैधानिक जिम्मेदारी है।

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