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Friday, June 19, 2026

कतर, अमेरिका और ईरान की मध्यस्थता से थमी जंग, इस्राइल-हिजबुल्ला फिर युद्धविराम पर सहमत

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यरुशलम। पश्चिम एशिया में कई दिनों से जारी तनाव और भीषण संघर्ष के बीच राहत भरी खबर सामने आई है। इस्राइल और हिजबुल्ला एक बार फिर युद्धविराम पर सहमत हो गए हैं। क्षेत्रीय और अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार कतर, अमेरिका और ईरान की सक्रिय मध्यस्थता के बाद दोनों पक्षों ने संघर्ष रोकने पर सहमति जताई है। इस घटनाक्रम को पूरे पश्चिम एशिया में शांति बहाली की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार हाल के दिनों में सीमा क्षेत्रों में लगातार गोलाबारी और हवाई हमलों के कारण हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए थे। संघर्ष का असर अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर भी पड़ा और स्विट्जरलैंड में प्रस्तावित अमेरिका-ईरान वार्ता को स्थगित करना पड़ा। इसके बाद क्षेत्रीय शक्तियों और अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थों ने युद्धविराम बहाल कराने के प्रयास तेज कर दिए थे।

बताया जा रहा है कि कतर, अमेरिका और ईरान के बीच कई दौर की बातचीत के बाद इस्राइल और हिजबुल्ला को संघर्ष रोकने के लिए राजी किया गया। दो क्षेत्रीय अधिकारियों और एक अमेरिकी अधिकारी ने युद्धविराम समझौते की पुष्टि की है। हालांकि दोनों पक्षों की ओर से अभी तक औपचारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन कूटनीतिक सूत्र इसे लगभग तय मान रहे हैं।

इस बीच अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का बयान भी चर्चा में रहा। उन्होंने अमेरिका-ईरान समझौते की आलोचना को लेकर इस्राइल को चेतावनी देते हुए कहा था कि अमेरिका का समर्थन इस्राइल के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिए सभी पक्षों को जिम्मेदारी से काम करना होगा। उनके इस बयान को भी युद्धविराम की दिशा में बढ़ते दबाव के रूप में देखा जा रहा है।

गौरतलब है कि इससे पहले अप्रैल में भी इस्राइल और लेबनान के बीच सीमित अवधि का युद्धविराम लागू किया गया था, लेकिन कुछ ही दिनों बाद संघर्ष फिर भड़क उठा था। लगातार हमलों और जवाबी कार्रवाई से लेबनान और उत्तरी इस्राइल के कई क्षेत्रों में जनजीवन प्रभावित हुआ तथा हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा। यदि यह नया युद्धविराम लंबे समय तक कायम रहता है तो इससे न केवल लेबनान और इस्राइल सीमा पर शांति बहाल होगी, बल्कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रही कूटनीतिक प्रक्रिया को भी गति मिल सकती है। हालांकि क्षेत्र की जटिल परिस्थितियों को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर अब दोनों पक्षों की अगली कार्रवाई और आधिकारिक घोषणाओं पर टिकी हुई है।

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