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Friday, June 19, 2026

शादी की खुशियां मातम में बदलीं: टेंट से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली पलटी, 11 घायल; अंकित की मौत से गांव में शोक

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जिस घर में आज बारात आनी थी, वहां छाया सन्नाटा; पत्नी हुई बेसुध, 8 माह की बेटी के सिर से उठा पिता का साया

अमृतपुर/फर्रुखाबाद

शादी समारोह की तैयारियों के बीच हुआ एक दर्दनाक सड़क हादसा कई परिवारों के लिए जिंदगी भर का जख्म बन गया। गुरुवार को टेंट का सामान और मजदूरों को लेकर जा रही ट्रैक्टर-ट्रॉली अनियंत्रित होकर पलट गई थी, जिसमें 11 लोग घायल हो गए थे। हादसे में गंभीर रूप से घायल 23 वर्षीय अंकित पुत्र आदर्श निवासी जटपुरा ने शुक्रवार को इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। अंकित की मौत की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया, जबकि पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई।
जानकारी के अनुसार ट्रैक्टर-ट्रॉली शादी समारोह के लिए टेंट का सामान लेकर जा रही थी। रास्ते में अचानक वाहन अनियंत्रित होकर पलट गया, जिससे उसमें सवार 11 लोग घायल हो गए। सभी घायलों को उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया। अंकित की हालत सबसे ज्यादा गंभीर थी, जिन्हें बचाने के लिए डॉक्टरों ने भरसक प्रयास किया, लेकिन शुक्रवार को उन्होंने जिंदगी की जंग हार दी।
अंकित की मौत ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। करीब दो वर्ष पूर्व उनका विवाह प्रियंका के साथ हुआ था। उनकी आठ माह की मासूम बेटी प्रिशा अभी यह भी नहीं जानती कि उसके सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ चुका है। पति की मौत के बाद पत्नी प्रियंका का रो-रोकर बुरा हाल है। घर में हर तरफ चीख-पुकार और मातम का माहौल है।इस हादसे की सबसे दुखद बात यह रही कि जिस परिवार में शादी थी, वहां शुक्रवार को बारात आने वाली थी। घर में खुशी और उत्सव का माहौल था, रिश्तेदारों का आना-जाना लगा था और शहनाइयों की तैयारी चल रही थी। लेकिन हादसे की खबर ने सारी खुशियों को गम में बदल दिया। जिस आंगन में बारात के स्वागत की तैयारी थी, वहां लोगों की आंखें नम दिखाई दीं।
हादसे में घायल अन्य 10 लोगों का अभी भी विभिन्न अस्पतालों में इलाज चल रहा है। इनमें सुधांशु की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिसे बेहतर उपचार के लिए मेडिकल कॉलेज तिर्वा रेफर किया गया है। चिकित्सकों की निगरानी में उसका इलाज जारी है।
अंकित को गांव का मिलनसार, मेहनती और जिम्मेदार युवक बताया जा रहा है। उनकी असमय मौत से न केवल परिवार बल्कि पूरे गांव को गहरा आघात पहुंचा है। घटना की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण और शुभचिंतक उनके घर पहुंचने लगे। हर किसी की आंखें नम थीं और जुबान पर सिर्फ एक ही बात थी कि यह हादसा नहीं, कई परिवारों की खुशियों पर पड़ा दुखों का पहाड़ है।एक तरफ दुल्हन के घर बारात के स्वागत की तैयारी थी, दूसरी तरफ अस्पताल में जिंदगी और मौत की जंग चल रही थी। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। एक पल में खुशियां मातम में बदल गईं, एक पत्नी का सुहाग उजड़ गया, एक मासूम बेटी अनाथ जैसी हो गई और पूरा गांव गम के साये में डूब गया। “शहनाइयों की गूंज से पहले मातम की चीखें सुनाई दीं, एक हादसे ने कई घरों की मुस्कान छीन ली।”

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