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Friday, June 19, 2026

फर्रुखाबाद में भ्रष्टाचार पर शिकंजा, घूसखोरों से लेकर मलाईदार कुर्सियों तक शासन की पैनी नजर

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– कई के स्थानांतरण के बाद भी जमे रहने का भी शासन में संज्ञान
लखनऊ,फर्रुखाबाद। जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई तेज होती दिखाई दे रही है। बीते छह माह के भीतर दूसरी बार एंटी करप्शन टीम द्वारा एक घूसखोर अधिकारी को रंगे हाथों गिरफ्तार किए जाने के बाद प्रशासनिक और सरकारी महकमों में हड़कंप मचा हुआ है। सूत्रों के अनुसार कई विभागों के अधिकारी-कर्मचारी जांच एजेंसियों के रडार पर हैं, जबकि पुलिस विभाग के कुछ कर्मियों की गतिविधियों पर भी नजर रखी जा रही है। पूर्व में एक पुलिसकर्मी के खिलाफ भी कार्रवाई हो चुकी है।

सूत्रों का कहना है कि जिले में लंबे समय से प्रॉपर्टी, भू-उपयोग परिवर्तन और विनियमित क्षेत्र से जुड़े मामलों की शिकायतें शासन तक पहुंच रही हैं। विशेष रूप से विनियमित क्षेत्र के एक सेवानिवृत्त अवर अभियंता की भूमिका को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। आरोप है कि सेवानिवृत्त होने के बाद भी उनका प्रभाव कम नहीं हुआ और विभागीय कार्यों में उनकी सक्रियता लगातार बनी हुई है।

जानकार बताते हैं कि तत्कालीन जिलाधिकारी आशुतोष द्विवेदी ने अपने कार्यकाल में संबंधित व्यक्ति से सरकारी आवास खाली कराने के लिए सख्त कदम उठाए थे। इतना ही नहीं, नियमों के उल्लंघन के मामले में जुर्माना भी लगाया गया था। इसके बावजूद जिले में उनके प्रभाव और हस्तक्षेप की चर्चाएं लगातार होती रही हैं। बताया जा रहा है कि इस पूरे मामले की जानकारी शासन स्तर तक पहुंच चुकी है और संबंधित बिंदुओं पर नजर रखी जा रही है।

वहीं कई विभागों में वर्षों से जमे लिपिकों और कर्मचारियों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि कुछ कर्मचारी मलाईदार पदों पर नियमों के विपरीत लंबे समय से तैनात हैं। इतना ही नहीं, शासन द्वारा स्थानांतरण आदेश जारी होने के बाद भी कई कर्मचारियों को कार्यमुक्त नहीं किया गया। यह मामला अब लखनऊ स्थित पंचम तल तक चर्चा का विषय बन चुका है।

प्रशासनिक गलियारों में चर्चा है कि आने वाले दिनों में कुछ और विभागों में जांच का दायरा बढ़ सकता है। एंटी करप्शन, विजिलेंस और शासन स्तर पर प्राप्त शिकायतों की समीक्षा की जा रही है। यदि आरोपों की पुष्टि होती है तो कई अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई की तलवार लटक सकती है।

जिले में लगातार सामने आ रहे भ्रष्टाचार के मामलों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर सरकारी तंत्र में जवाबदेही कब सुनिश्चित होगी। फिलहाल शासन की नजर फर्रुखाबाद पर टिकी हुई है और माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में कई बड़े खुलासे और कार्रवाई सामने आ सकती हैं।

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