39.9 C
Lucknow
Tuesday, June 9, 2026

बुलडोजर पर हाईकोर्ट का ब्रेक! जेएनवी रोड ध्वस्त कर दिया गया था राजकुमार भदौरिया का मकान

Must read

– हाई कोर्ट के सख्त आदेश के बाद डीएम नें बनाई पैमाइश कमेटी

– मुआवजे पर अगली सुनवाई में होगा बड़ा फैसला

– उच्च न्यायालय के वकील विनोद श्रीवास्तव नें दिलाया न्याय

फर्रुखाबाद। जेएनवी रोड पर राजकुमार भदौरिया के मकान पर चले बुलडोजर की गूंज अब इलाहाबाद हाईकोर्ट तक पहुंच चुकी है। बहुचर्चित राजकुमार भदौरिया प्रकरण में हाईकोर्ट के आदेश के बाद जिला प्रशासन को बैकफुट पर आना पड़ा है। अदालत के निर्देश पर अब प्रशासन जमीन की पैमाइश कराकर राजकुमार भदौरिया की पत्नी सरोज सिंह के हिस्से की भूमि का सीमांकन करेगा और कब्जा बहाली की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। वहीं मकान ध्वस्तीकरण से हुए नुकसान के मुआवजे का मुद्दा अभी जीवित है, जिस पर अगली सुनवाई में महत्वपूर्ण निर्णय होने की संभावना है।

मामले के दस्तावेजों के अनुसार जय नारायण वर्मा रोड निवासी सरोज सिंह बनाम उत्तर प्रदेश सरकार एवं अन्य शीर्षक से दाखिल रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने 25 मई 2026 को महत्वपूर्ण आदेश पारित किया। न्यायमूर्ति अजीत कुमार और न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ला की पीठ ने माना कि यह मामला लोक निर्माण विभाग की भूमि और याचिकाकर्ता की भूमि की सीमाओं के ओवरलैप का है, जिसे पैमाइश और सीमांकन के माध्यम से स्पष्ट किया जाना आवश्यक है।

याचिका में सरोज सिंह ने कहा कि वर्ष 1983 में उन्होंने पंजीकृत बैनामे के आधार पर भूमि खरीदी थी और वर्ष 1984 में स्वीकृत नक्शे के आधार पर मकान का निर्माण कराया गया था। परिवार दशकों से उसी मकान में निवास कर रहा था। आरोप है कि वर्ष 2022 में प्रशासन ने बिना समुचित नोटिस और सुनवाई का अवसर दिए मकान ध्वस्त कर दिया।

हाईकोर्ट में राज्य सरकार की ओर से यह तर्क दिया गया कि प्लॉट संख्या 288 का अधिकांश हिस्सा लोक निर्माण विभाग का है, जबकि याचिकाकर्ता के पास केवल 0.01 एकड़ भूमि का स्वामित्व है। इसके बावजूद सरकार ने यह स्वीकार किया कि याचिकाकर्ता के हिस्से की भूमि मौजूद है। यहीं से मामला सीमांकन और वास्तविक कब्जे के निर्धारण का बन गया।

अदालत ने निर्देश दिया कि राजस्व अधिकारियों, तकनीकी विशेषज्ञों, नगर पालिका और संबंधित विभागों की टीम गठित कर भूमि की पैमाइश कराई जाए। सीमांकन के बाद स्थायी पिलर लगाकर सीमाएं तय की जाएं ताकि भविष्य में कोई विवाद न रहे।

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि पैमाइश पूरी होने के बाद याचिकाकर्ता को उसकी वैध भूमि पर कानून के अनुसार निर्माण कराने का अधिकार होगा।

प्रशासन ने जारी किए आदेश

हाईकोर्ट के आदेश के बाद उप जिलाधिकारी सदर कार्यालय से 9 जून 2026 को आदेश जारी कर राजस्व निरीक्षक, लेखपाल, पीडब्ल्यूडी के अभियंताओं, नगर पालिका अधिकारियों और पुलिस को 10 जून को मौके पर उपस्थित रहकर पैमाइश कराने के निर्देश दिए हैं।

Must read

More articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Latest article