नई दिल्ली। देश की शिक्षा और भर्ती व्यवस्था पर लगातार उठ रहे सवालों के बीच शनिवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हजारों छात्रों, अभ्यर्थियों, युवाओं और अभिभावकों का आक्रोश खुलकर सामने आया। प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक, परीक्षा रद्द होने, भर्ती प्रक्रियाओं में देरी और बढ़ती बेरोजगारी के खिलाफ आयोजित प्रदर्शन में युवाओं ने सरकार और व्यवस्था से जवाब मांगा। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वर्षों की मेहनत के बावजूद उनका भविष्य अनिश्चितता के अंधेरे में धकेला जा रहा है।
जंतर-मंतर पर जुटी भीड़ में सिर्फ छात्र ही नहीं बल्कि बड़ी संख्या में अभिभावक भी शामिल हुए। कई माता-पिता ने कहा कि परीक्षा विवादों और लगातार बदलती प्रक्रियाओं ने उनके बच्चों को मानसिक तनाव में डाल दिया है। तीन बेटियों के साथ प्रदर्शन में पहुंचीं एक महिला ने कहा कि बच्चों का भविष्य दांव पर लगा है और हर नई परीक्षा के साथ चिंता बढ़ती जा रही है। अभिभावकों का दर्द था कि शिक्षा व्यवस्था की खामियों का खामियाजा पूरा परिवार भुगत रहा है।
प्रदर्शन में शामिल युवाओं ने आरोप लगाया कि मेहनत करने वाले छात्र पीछे छूट जाते हैं, जबकि सिस्टम की खामियों का फायदा उठाने वाले आगे निकल जाते हैं। छात्रों का कहना था कि परीक्षा रद्द होने, परिणामों में देरी और पेपर लीक जैसी घटनाओं ने उनके विश्वास को गहरी चोट पहुंचाई है। कई अभ्यर्थियों ने कहा कि वे वर्षों तक तैयारी करते हैं, लेकिन एक गलती या घोटाला उनकी पूरी मेहनत पर पानी फेर देता है।
रोजगार के मुद्दे भी प्रदर्शन के केंद्र में रहे। युवाओं ने कहा कि देश दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी होने का दावा करता है, लेकिन रोजगार और शिक्षा जैसे मूल मुद्दों पर ठोस समाधान दिखाई नहीं देता। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो और युवाओं के भविष्य के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ बंद किया जाए।
जंतर-मंतर पर उठी यह आवाज केवल एक प्रदर्शन नहीं बल्कि उस पीढ़ी की बेचैनी का प्रतीक बनकर सामने आई, जो डिग्री और मेहनत के बावजूद अपने भविष्य को लेकर असुरक्षित महसूस कर रही है। युवाओं और अभिभावकों का संदेश साफ था—यदि शिक्षा और भर्ती व्यवस्था में भरोसा बहाल नहीं हुआ तो असंतोष की यह चिंगारी आने वाले दिनों में और बड़ी चुनौती बन सकती है।


