योगी की सादगी पर भारी पड़ा ‘शाही स्वागत’, बाराबंकी में अफसरशाही का नया तमाशा
बाराबंकी। मुख्यमंत्री की वीआईपी संस्कृति खत्म करने की नसीहतों के बीच बाराबंकी के नए मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रंजन गौतम का स्वागत जिस अंदाज में हुआ, उसने सरकारी तंत्र की कार्यशैली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकारी कार्यालय में एक अधिकारी के स्वागत के लिए रेड कार्पेट बिछाया गया, फूलों की सजावट की गई, गुलाब की पंखुड़ियों की बारिश कराई गई और तीन गाड़ियों के काफिले के साथ उनकी एंट्री कराई गई। पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला चर्चा का विषय बन गया है।
बाराबंकी सीएमओ कार्यालय बुधवार को किसी सरकारी दफ्तर से ज्यादा एक शाही दरबार जैसा नजर आया। नए सीएमओ के स्वागत के लिए कर्मचारियों ने कार्यालय परिसर को फूलों से सजाया। जैसे ही डॉ. गौतम अपनी पत्नी और बच्चों के साथ पहुंचे, उन पर गुलाब की पंखुड़ियां बरसाई गईं। कार्यालय के प्रवेश द्वार तक रेड कार्पेट बिछाया गया था, जिस पर चलते हुए उन्होंने कार्यभार ग्रहण किया।विशेष बात यह रही कि डॉ. गौतम की सरकारी गाड़ी को भी फूलों से सजाया गया था। उनके काफिले में तीन वाहन शामिल थे। सबसे आगे डिप्टी सीएमओ की सरकारी गाड़ी, उसके पीछे फूलों से सजी सीएमओ की गाड़ी और तीसरे वाहन में उनका परिवार मौजूद था। इस पूरे आयोजन ने सरकारी संसाधनों के उपयोग और वीआईपी संस्कृति को लेकर बहस छेड़ दी है।
डॉ. रंजन गौतम को हाल ही में फर्रुखाबाद में एसीएमओ पद से पदोन्नत कर बाराबंकी का सीएमओ बनाया गया है। फर्रुखाबाद में उन्होंने अवैध नर्सिंग होम और झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ अभियान चलाकर पहचान बनाई थी, लेकिन बाराबंकी में उनकी पहली एंट्री ही विवादों में घिर गई है।सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरों और वीडियो के बाद लोगों ने सवाल उठाना शुरू कर दिया कि जब प्रदेश सरकार सादगी और जवाबदेही की बात करती है, तब एक सरकारी अधिकारी के स्वागत में ऐसा शाही प्रदर्शन क्यों किया गया। कई लोगों ने इसे वीआईपी संस्कृति का खुला प्रदर्शन बताया।
इस बीच स्वागत कार्यक्रम से जुड़ा एक और मामला चर्चा में है। बताया गया कि सीएमओ को रिसीव करने पहुंचे डिप्टी सीएमओ एल.बी. गुप्ता रास्ते में दुर्घटना का शिकार हो गए और उनके हाथ में फ्रैक्चर हो गया। घटना के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा, जहां उनके हाथ में प्लास्टर चढ़ाया गया।सरकारी महकमे में अब चर्चा इस बात की है कि क्या एक प्रशासनिक अधिकारी के स्वागत के लिए इस तरह का आयोजन वास्तव में आवश्यक था, या फिर यह वही वीआईपी संस्कृति है जिसे खत्म करने की बात लगातार की जाती रही है। बाराबंकी का यह ‘रेड कार्पेट स्वागत’ अब पूरे प्रदेश में अफसरशाही के तौर-तरीकों पर सवाल खड़े कर रहा है।


