संभल। उत्तर प्रदेश के संभल में 48 वर्ष पुराने सांप्रदायिक दंगे का एक अधूरा अध्याय अब पूरा होने जा रहा है। 1978 के दंगों में अपना परिवार, कारोबार और आशियाना खोने वाले रस्तोगी परिवार को एक बार फिर उसी शहर में बसाने की तैयारी पूरी कर ली गई है। बुधवार 3 जून को प्रशासन पीड़ित परिवार को कब्जामुक्त कराई गई भूमि का पट्टा सौंपेगा। इस घटनाक्रम को केवल प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि दशकों से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे एक परिवार की घर वापसी के रूप में देखा जा रहा है।
संभल के जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल और पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार विश्नोई की मौजूदगी में शेर खा सराय क्षेत्र में 100 वर्गमीटर भूमि का पट्टा रस्तोगी परिवार को सौंपा जाएगा। प्रशासन के अनुसार जिस भूमि को पूर्व में अवैध कब्जे से मुक्त कराया गया था, उसी पर पीड़ित परिवार को दोबारा बसाया जाएगा।
यह मामला 1978 के उस भयावह दंगे से जुड़ा है, जिसने संभल के सामाजिक इतिहास पर गहरा घाव छोड़ा था। दंगे के दौरान कोटपूर्वी मोहल्ले के निवासी रामसरन दास रस्तोगी की निर्मम हत्या कर दी गई थी। परिवार का आरोप है कि दंगाइयों ने उनकी दुकान पर ही हत्या कर शव को कुएं में फेंक दिया था। इस घटना के बाद भयभीत परिवार संभल छोड़कर दिल्ली में बस गया था।
करीब पांच दशक बाद परिवार ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलकर न्याय और पुनर्वास की मांग की थी। परिवार का कहना था कि दंगों के दौरान उनकी संपत्तियां छीन ली गईं और वे अपने ही शहर में बेघर हो गए। मुख्यमंत्री ने सार्वजनिक मंच से इस मामले का उल्लेख करते हुए परिवार को न्याय दिलाने का भरोसा दिया था।
इसके बाद प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए शेर खा सराय क्षेत्र में सरकारी भूमि से अवैध कब्जा हटवाया। राजस्व विभाग द्वारा पैमाइश कराकर भूमि को पुनः सरकारी अभिलेखों में दर्ज किया गया और अब उसी भूमि का एक हिस्सा पीड़ित परिवार को आवंटित किया जा रहा है।
प्रशासन ने कार्यक्रम को प्रतीकात्मक महत्व देते हुए भूमि पूजन और वैदिक विधि-विधान के साथ पट्टा वितरण की तैयारी की है। अधिकारियों का कहना है कि यह केवल एक परिवार का पुनर्वास नहीं बल्कि शासन की उस नीति का हिस्सा है, जिसके तहत वर्षों पुराने मामलों में भी न्याय सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है।


