– स्थानीय विभाग की ढीली निगरानी पर खडे हुए सवाल
– पुलिस का पहली बार दखल देख आलाधिकारी चकित
– लाखों के राजस्व नुकसान की आशंका, खुफिया रिपोर्ट के बाद हरकत में अफसर
फर्रुखाबाद/कायमगंज। कायमगंज क्षेत्र में तंबाकू कारोबार से जुड़े बड़े राजस्व खेल की चर्चाओं ने स्थानीय जीएसटी विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पहली बार विभागीय मामलों में पुलिस का दखल देख आलाधिकारी सकते में हैं,सूत्रों के अनुसार लंबे समय से विभाग की कथित ढीली निगरानी और नरम रवैये के चलते सरकार को लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है।
जानकारी के मुताबिक क्षेत्र में तंबाकू और उससे जुड़े उत्पादों का कारोबार खुलेआम संचालित हो रहा है, लेकिन कारोबार के वास्तविक आंकड़ों और कर भुगतान के बीच बड़े अंतर की चर्चाएं सामने आ रही हैं।एक सफ़ेद पोश धार्मिक चोला ओढ़े दलाल की मध्यस्तता के बीच कुछ कारोबारी कथित “सेटिंग” के भरोसे नियमों को दरकिनार कर कारोबार चला रहे हैं, जिससे सरकारी खजाने को चूना लग रहा है।खुलेआम माफिया के गुर्गे ट्रांसपोर्टर की मनमानी और हाठधर्मिता की जानकारी शासन तक पहुंची है।
सूत्र बताते हैं कि हाल के दिनों में राजस्व संग्रह के आंकड़ों में आई गिरावट और कारोबार के वास्तविक आकार को लेकर शासन स्तर पर भी सवाल उठे हैं। इसके बाद विभागीय अधिकारियों ने संबंधित फाइलों और अभिलेखों की समीक्षा शुरू कर दी है।
विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार खुफिया तंत्र द्वारा भेजी गई रिपोर्ट में कुछ कारोबारियों के लेनदेन, बिलिंग और कर भुगतान से जुड़े मामलों को लेकर विभागीय खुफिया को सतर्क किया गया है। रिपोर्ट के बाद विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लिया है और संबंधित पत्रावलियों को तलब किए जाने की तैयारी चल रही है।
बताया जा रहा है कि जांच के दौरान खरीद-बिक्री, ई-वे बिल, जीएसटी रिटर्न और वास्तविक कारोबार के आंकड़ों का मिलान किया जा सकता है। यदि अनियमितताएं सामने आती हैं तो कई कारोबारियों पर बड़ी कार्रवाई की तलवार लटक सकती है।
स्थानीय व्यापारिक हलकों में चर्चा है कि यदि कारोबार का दायरा बड़ा है तो राजस्व संग्रह में गिरावट क्यों दिखाई दे रही है? यही सवाल अब विभाग के भीतर भी उठने लगे हैं। मामले ने विभागीय निगरानी व्यवस्था और निरीक्षण प्रणाली की प्रभावशीलता पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
कायमगंज लंबे समय से तंबाकू कारोबार का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। ऐसे में यदि कारोबार बढ़ रहा हो और राजस्व घट रहा हो तो यह केवल वित्तीय मामला नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही का भी विषय बन जाता है।
अब निगाहें इस बात पर हैं कि खुफिया अलर्ट के बाद शुरू हुई हलचल वास्तविक कार्रवाई में बदलती है या नहीं। यदि जांच निष्पक्ष हुई तो कई ऐसे तथ्य सामने आ सकते हैं जो राजस्व तंत्र और स्थानीय कारोबार दोनों को प्रभावित कर सकते हैं।


