लखनऊ। एक ओर उत्तर प्रदेश सरकार गोवंश संरक्षण को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल बताती है, वहीं दूसरी ओर राजधानी लखनऊ के बख्शी का तालाब (बीकेटी ) ब्लॉक की कई गौशालाओं से सामने आ रही तस्वीरें और आरोप व्यवस्था की हकीकत पर बड़े सवाल खड़े कर रहे हैं। नौतपा की भीषण गर्मी के बीच नगुवामऊ, भगौतीपुर और कठवारा गौशालाओं में गोवंशों की बदहाली को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी है।
ग्रामीणों का आरोप है कि गौशालाओं में चारे और पानी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। भीषण गर्मी में गोवंश खुले टीन शेड के नीचे झुलसने को मजबूर हैं। कई स्थानों पर पशुओं के लिए न तो पर्याप्त छाया की व्यवस्था है और न ही गर्मी से राहत दिलाने के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए गए हैं।
स्थानीय लोगों का दावा है कि भूख, प्यास और हीटस्ट्रोक के कारण कई गोवंशों की मौत हो चुकी है। हालांकि प्रशासनिक स्तर पर इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते व्यवस्थाओं में सुधार नहीं किया गया तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद गौशालाओं में मूलभूत सुविधाओं का अभाव क्यों है? जब तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच रहा है, तब पशुओं के लिए शीतल जल, हरे चारे और पर्याप्त छायादार स्थान की व्यवस्था सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कई बार शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी मौके पर पहुंचकर हालात का जायजा लेने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। इससे लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। उनका कहना है कि गोवंश संरक्षण केवल सरकारी विज्ञापनों और दावों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि धरातल पर भी इसकी तस्वीर दिखाई देनी चाहिए।
अब निगाहें जिला प्रशासन और पशुपालन विभाग पर टिकी हैं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह केवल लापरवाही का मामला नहीं होगा, बल्कि उन गोवंशों के जीवन से जुड़ा गंभीर प्रश्न होगा जिनकी सुरक्षा और देखभाल का दायित्व सरकार और स्थानीय प्रशासन पर है।


